
नई दिल्ली। पाकिस्तान प्रशासन(Pakistan administration) ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan)क्षेत्र में ड्रोन उड़ानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह फैसला पाकिस्तान के गृह मंत्रालय (Pakistan Home Ministry)के निर्देश पर लिया गया है और इसे क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा (Security) चिंताओं से जोड़कर देखा जा रहा है। गिलगित-बाल्टिस्तान पुलिस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (Legal Action) की जाएगी। हालांकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) और खुफिया संस्थानों को उनके पेशेवर दायित्वों के तहत ड्रोन इस्तेमाल की छूट दी गई है। यह निर्णय क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया बताया जा रहा है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब Pakistan और Afghanistan के बीच सीमा पर तनाव गहराता जा रहा है। खासकर डूरंड लाइन के आसपास हाल के दिनों में गतिविधियां तेज हुई हैं और ड्रोन के संभावित दुरुपयोग को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। माना जा रहा है कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी और संभावित हमलों की आशंका के मद्देनजर यह प्रतिबंध एहतियाती कदम के रूप में लगाया गया है।
दूसरी ओर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि रात भर चले सैन्य अभियानों में उसने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। तालिबान के बयान के मुताबिक ये हमले डूरंड लाइन के साथ पक्तिका पक्तिया खोस्त नंगरहार कुन्नर और नूरिस्तान प्रांतों के निकट हुए। तालिबान ने यह भी दावा किया कि दो पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया। बयान में कहा गया कि ये कार्रवाई पाकिस्तानी सेना की कथित उकसावे के जवाब में की गई और मध्यरात्रि को इस्लामिक अमीरात के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के आदेश पर अभियान समाप्त कर दिया गया।
हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने जवाबी कार्रवाई में अफगानिस्तान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए जिनमें बड़ी संख्या में तालिबान लड़ाके मारे गए। दोनों पक्षों के दावों में भारी अंतर है जिससे जमीनी स्थिति की सटीक तस्वीर सामने आना मुश्किल हो रहा है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कोई नया नहीं है। डूरंड लाइन को लेकर दशकों से विवाद बना हुआ है और तालिबान शासन की वापसी के बाद तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान जैसे संगठनों की गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच आरोप प्रत्यारोप तेज हुए हैं। सीमा पार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने अविश्वास को और गहरा कर दिया है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में ड्रोन प्रतिबंध को इसी व्यापक सुरक्षा परिदृश्य का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक संघर्षों में ड्रोन तकनीक का बढ़ता उपयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। ऐसे में संवेदनशील सीमाई क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाकर पाकिस्तान संभावित खतरों को कम करना चाहता है।
लेकिन सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। यदि हालात पर काबू नहीं पाया गया तो यह टकराव व्यापक संघर्ष का रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भी इस घटनाक्रम पर टिकी है क्योंकि दक्षिण एशिया में अस्थिरता का असर व्यापक भू राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। ऐसे समय में संयम संवाद और कूटनीतिक पहल ही स्थिति को बिगड़ने से रोकने का सबसे प्रभावी रास्ता माना जा रहा है।
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