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पश्चिमी एशिया में तनाव के चलते क्रूड आइल में तेजी… भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

March 06, 2026

नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया (Western Asia) में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में उछाल जारी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छह दिन से जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम 15 फीसदी बढ़कर 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। सरकार ने आश्वस्त किया है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का भारतीय उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि भारत में पर्याप्त मात्रा में तेल और गैस मौजूद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में फिलहाल दाम नहीं बढ़ेंगे।

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, एलपीजी के मामले में भारत सिर्फ कतर के भरोसे नहीं है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी गैस भिजवाने का ऑफर किया है। मंत्रालय का दावा है कि अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत ने नए बाजार तलाश लिए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हम इस क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों के संपर्क में हैं। इस बीच, जहां सरकार ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है। अमेरिका से खपत की करीब दस फीसदी एलपीजी लेनी शुरू कर दी है।


  • भारत आईईए और ओपेक के साथ वैकल्पिक सप्लाई पर बातचीत कर रहा है। सभी आपूर्तिकर्ताओं और व्यापारिक संगठनों के साथ निरंतर बातचीत जारी है। वहीं सरकार सस्ते बीमा के मुद्दों पर अमेरिका के डीएफसी से भी बात कर रही है।

    महंगा नहीं होगा कच्चा तेल
    सरकार के रणनीतिकार मानते हैं कि छह दिन के युद्ध में कच्चे तेल की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची हैं। युद्ध कुछ दिन और चलता है, तो दाम 90 डॉलर तक जा सकते हैं। लड़ाई थमते ही दाम कम हो जाएंगे, क्योंकि बाजार में बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल उपलब्ध है।

    कतर के फैसले का असर
    कतर ने अपना गैस उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया है। भारत अभी 195 मिलियन मीट्रिक स्टेंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस आयात करता है। इसमें सिर्फ 60 एमएमएससीएम यानी करीब 30 फीसदी कतर से आयात की जाती है। सरकार इस कमी को पूरी करने का प्रयास कर रही है, जरूरत पड़ी तो गैस कंपनियां गैस आपूर्ति को लेकर अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं।

    घरेलू गैस सप्लाई पर असर नहीं
    सरकार का कहना है कि गैस की कमी होती भी है, तो इसका घरेलू मसलन पीएनजी और सीएनजी उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं होगा। उद्योगों के पास वैकल्पिक ऊर्जा संसाधन होते हैं, ऐसे में कंपनियां उद्योगों को प्राथिमकता के आधार पर गैस मुहैया कर सकती है। पर अभी इस तरह की कोई स्थिति पैदा नहीं हुई है।

    होर्मुज जलमार्ग का असर
    ईरान की धमकी का भारत पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय का कहना है कि भारत का कुल आयात का 40% हिस्सा होर्मुज से गुजरता है, बाकी 60% दूसरे रास्तों से आता है। इसकी भरपाई के लिए भारत ने सुरक्षित मार्गों से अपना आयात बढ़ा दिया है।

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