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इंदौर में ईडी का शिकंजा, शराब कारोबारियों से लेकर निगम अफसर भी फंसे

February 11, 2026

  • लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू या आयकर की कार्रवाई के आधार पर ईडी ने दर्ज किए कई प्रकरण, छापामार कार्रवाई के साथ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अचल सम्पत्तियों की जब्ती-कुर्की भी

इंदौर। देश में कई बड़ी कार्रवाइयां तो ईडी ने की, जिससे राजनीतिक हलके में लगातार खौफ भी रहा, तो दूसरी तरफ अब इंदौर जैसे शहर में भी ईडी की कार्रवाई लगातार बढ़ गई है। यहां तक कि एक-दो करोड़ रुपए के छोटे मामले भी ईडी में दर्ज होने लगे हैं। कल ही नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार की 1 करोड़ 6 लाख रुपए की सम्पत्ति को ईडी ने अटैच कर लिया। इसके पूर्व भी इंदौर में इसी तरह कार्रवाई हो चुकी है। यहां तक कि शराब घोटाले में लिप्त ठेकेदारों से लेकर मेडिकल कॉलेजों में हुई मान्यता के मामले में ईडी छापामार कार्रवाई कर चुकी है। इंदौर में ही ईडी का दफ्तर भी मौजूद है।

पिछले दिनों ही कई निजी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों पर ईडी ने छापामार कार्रवाई की और इंदौर से लेकर छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश सहित 40 ठिकानों पर छापे मारे और इसमें लिप्त कुछ डॉक्टरों सहित अन्य को गिरफ्तार भी किया। मेडिकल कॉलेज संचालकों पर आरोप लगे कि इन्होंने करोड़ों रुपए की डील करते हुए बोगस मान्यताएं हासिल की। इसी तरह इंदौर के आबकारी विभाग में जो 48 करोड़ रुपए का फर्जी चालान घोटाला उजागर हुआ उस मामले में शराब ठेकेदारों के ठिकानों पर भी ईडी ने ना सिर्फ छापे डाले, बल्कि करोड़ों रुपए की सम्पत्तियां भी अटैच कर ली। रावजी बाजार थाने में आबकारी विभाग ने ही 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की थी, जिसके चलते ईडी ने इस मामले को टेकओवर कर लिया।

इतना ही नहीं, आयकर से लेकर ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त ने भी भ्रष्टाचार के जिन प्रमुख मामलों में प्रकरण दर्ज किए उन मामलों में भी ईडी की एंट्री हुई और मनी लॉन्ड्रिंग के प्रकरण दर्ज करते हुए बीते कुछ समय में भी कई कार्रवाई को अंजाम दिया। यहां तक कि इंदौर के एक कांग्रेस नेता की भी सम्पत्ति अटैच की गई, जिन पर सट्टा और डब्बा ट्रेडिंग के अवैध कारोबार का आरोप लगाया गया और भूमाफियाओं से जुड़ी सैटेलाइट टाउनशिप के पार्टनर रहे अम्बिका सॉल्वेक्स, नारायण निर्यात इंडिया समूह पर भी ईडी ने कार्रवाई की, जिसने 110 करोड़ रुपए का लोन बैंकों से लेकर धोखाधड़ी की और रजिस्ट्री किए हुए भूखंड खरीद लिए। एक गुटखा कारोबारी भी ईडी जांच में फंसे हैं, तो नगर निगम में जो फर्जी बिल घोटाला 100 करोड़ रुपए से अधिक का सालभर पहले उजागर हुआ था उस मामले में भी ईडी ने कार्रवाई की है। अभी कल ही सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार के खिलाफ भी ईडी ने आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत 1.06 करोड़ रुपए की अचल सम्पत्ति को अटैच कर लिया।

ईडी के इंदौर सब झोनल कार्यालय द्वारा इस तरह की कार्रवाई लगातार की जा रही है और परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं में भी प्रकरण दर्ज किया गया और ईडी ने अपनी जांच में बताया कि वर्ष 2007 से 2022 के बीच परमार ने लगभग 1.66 करोड़ रुपए की सम्पत्तियां अर्जित की, जो कि उनकी ज्ञात वैध आय से 175 फीसदी अधिक है। लिहाजा इस अवधि में अपराध से अर्जित संदिग्ध आय को 1.21 करोड़ रुपए आंका गया और पूछताछ के दौरान परमार सम्पत्तियों की खरीदी में इस्तेमाल धन का कोई वैध और संतोषजनक स्त्रोत प्रस्तुत नहीं कर पाए, जिससे ईडी ने यह माना कि उक्त सम्पत्तियां अवैध रूप से अर्जित की गई, जिसके चलते ईडी ने इन सम्पत्तियों को अटैच कर लिया।

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