
नई दिल्ली। नेपाल (Nepal) में बीते साल हुए भ्रष्टाचार विरोधी युवा प्रदर्शनों और के पी शर्मा ओली (K P Sharma Oli) की सरकार के पतन के करीब छह महीने बाद अगले सप्ताह आम चुनाव (General Election) होने हैं। सुशीला कार्की (Sushila Karki) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने 5 मार्च को मतदान की घोषणा की थी, जिसके बाद देश में नई सरकार चुनी जाएगी। इस चुनाव पर भारत भी बारीकी से नजर रख रहा है। भारत में सवाल उठ रहे हैं कि नेपाल की नई सरकार भारत और चीन के बीच संतुलन बैठा पाएगी या किसी एक देश को प्राथमिकता देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे किसी भी पार्टी की सरकार बने, नेपाल की परंपरागत संतुलित नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
चुनाव की तैयारियां और राजनीतिक परिदृश्य
नेपाल में मतदान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। युवा उम्मीदवार चुनाव में अर्थव्यवस्था सुधारने और पुरानी राजनीतिक जमात को हटाने का वादा कर रहे हैं, जबकि अनुभवी नेता स्थिरता और सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा मान रहे हैं। अभी यह तय नहीं है कि किस पार्टी को बहुमत मिलेगा। नेपाली पत्रकार सुधीर शर्मा के मुताबिक किसी एक पार्टी के लिए पूर्ण बहुमत पाना मुश्किल है, इसलिए गठबंधन की राजनीति जारी रह सकती है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के साथ नेपाल के संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि गठबंधन कैसा बने और उसमें कौन प्रमुख भूमिका निभाए।
भारत और चीन से संबंध
रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। नेपाल के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत (लगभग 8.6 अरब डॉलर) है, जबकि चीन 13 प्रतिशत (1.8 अरब डॉलर) के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है और दोनों देश धार्मिक-सांस्कृतिक तौर पर भी करीब हैं। नेपाल बुनियादी ढांचे के जरिए दोनों देशों से जुड़ा हुआ है। कई जलविद्युत परियोजनाओं के जरिए बिजली भारत को जाती है, जबकि चीन तिब्बत के रास्ते बेल्ट एंड रोड पहल के तहत सड़क, रेलवे और हवाईअड्डों में निवेश कर रहा है।
संतुलन बनाने की कोशिश जारी रहेगी
दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के मुताबिक नेपाल की नेतृत्व व्यवस्था आमतौर पर भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है। कभी-कभी किसी एक की ओर झुकाव दिखे, लेकिन नीति में बड़ा अंतर नहीं आता। उन्होंने कहा कि अगर युवा नेता सत्ता में आते हैं, तो भी नीति में केवल पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सख्त रुख देखने को मिल सकता है। युवा नेपालियों का नजरिया साफ है—ना तो चीन से खास दुश्मनी है और ना ही वे चाहते हैं कि कोई भी देश अपारदर्शी तरीके से नेपाल की राजनीति को प्रभावित करे।
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