
वॉशिंगटन । भारत और अमेरिका (India and America) के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade agreements) पर अब अमेरिकी सत्ता के भीतर ही खींचतान सामने आ गई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, खुद ट्रंप प्रशासन (Trump administration) के कुछ बड़े चेहरे इस डील की राह में रोड़ा बने हुए हैं. अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस ने ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के सांसद टेड क्रूज के हवाले से बताया है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President JD Vance) और व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो ने भारत के साथ ट्रेड डील को आगे बढ़ने से रोका. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि क्रूज की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है, जिसमें वह अपने डोनर्स से निजी बैठकों में इस मुद्दे पर खुलकर नाराजगी जाहिर करते सुनाई देते हैं.
भारत से समझौते के लिए लड़ रहे
रिकॉर्डिंग में क्रूज कहते हैं कि वह भारत के साथ समझौते को आगे बढ़ाने के लिए ‘व्हाइट हाउस से लड़ रहे हैं.’ जब उनसे पूछा गया कि इसका विरोध कौन कर रहा है, तो उन्होंने नवारो, वेंस और कई बार खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिया. दिलचस्प बात यह है कि सार्वजनिक तौर पर डोनाल्ड ट्रंप भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर बेहद सकारात्मक बयान दे रहे हैं. दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने कहा था,
‘मैं आपके प्रधानमंत्री पर बहुत सम्मान करता हूं. वह शानदार इंसान हैं और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच एक अच्छा सौदा होगा.’ लेकिन अंदरखाने तस्वीर अलग बताई जा रही है.
टैरिफ को लेकर ट्रंप से हुई तीखी बहस
रिपोर्ट के अनुसार, क्रूज ने दानदाताओं से बातचीत में चेतावनी दी कि ट्रंप की टैरिफ नीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. उन्होंने कहा कि अगर 2026 के चुनाव से पहले लोगों की बचत घट गई और महंगाई बढ़ी, तो रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान होगा और ट्रंप को लगातार महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है. क्रूज ने यह भी बताया कि अप्रैल 2025 में जब ट्रंप ने नए टैरिफ लागू किए, तो उन्होंने और कई सीनेटरों ने देर रात तक ट्रंप से बात की और उन्हें फैसला बदलने को कहा. लेकिन बातचीत खराब रही. क्रूज के मुताबिक, ट्रंप उस वक्त गुस्से में थे और बातचीत काफी तीखी हो गई.
जेडी वेंस पर क्या कहा?
रिकॉर्डिंग में क्रूज़ ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर भी निशाना साधा और उन्हें टीवी कमेंटेटर टकर कार्लसन का ‘शिष्य’ बताया. उनका आरोप है कि वेंस और कार्लसन की सोच अमेरिका की विदेश नीति को कमजोर कर रही है. इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता सिर्फ दो देशों का मुद्दा नहीं रह गया है. यह अब अमेरिकी राजनीति के भीतर भी एक बड़ा विवाद बन चुका है. यह रिकॉर्डिंग 10 मिनट की है, जो 2025 के शुरुआत या मध्य की है.
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