
सिरफिरी के हाथ सत्ता (Power)… न भेजे में दिमाग…न जुबान पर लगाम (Keep your tongue in check)… न कानून-कायदों का भान… न देश का मान… जो मुंह में आया बकती है… मनमानी करती रहती है… कभी ईडी को भगाती है…कभी सीबीआई को दुत्कारती है…कभी केंद्र को ललकारती है…देश में घुसपैठिए (Intruders) घुसाती है…आतंक फैलाती है और फर्जी वोटों के जरिए पश्चिम बंगाल की सत्ता में आती है…खुद को विपक्ष का सरमाएदार मानती है और ऊलजुलूल जुबान चलाती है… ममता बनर्जी को अजीत पवार की मौत में भी साजिश नजर आती है…दुर्घटना को भाजपा की चाल बताती है…अब पगलाई ममता को कौन समझाए कि सरकार की नुमाइंदगी कर रहे पवार को भला सरकार ही क्यों मरवाएगी…अपने समर्थन पर संकट क्यों लाएगी और मौसम की खराबी से हुई दुर्घटना में साजिश कैसे कर पाएगी…वैसे भी ममता को अब समझाने की नहीं, हटाने की जरूरत है… उसका वजूद मिटाने की जरूरत है…भाजपा सरकार बनाने और मिटाने में माहिर है… अब तक वह यह खेल अपने मतलब के लिए करती आई है, लेकिन अब यह काम देश के अस्तित्व के लिए…देश की सुरक्षा और अस्मिता के लिए…देश पर मंडराते खतरे को रोकने के लिए करना पड़ेगा… पता नहीं क्यों भाजपाई नेता उसे सहन किए जा रहे हैं…वो ईडी को ललकारे तो खामोश हो जाते हैं…सीबीआई को हकाले तो कुछ नहीं कर पाते हैं… वो राज्य को कत्लगाह बनाए… दुश्मन बसाए…आतंकवादी बुलाए…फिर भी उसके हौसलों और हिमाकतों को चुनौती नहीं दी जाती… उसकी सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जाता…उसकी जुबान और हरकतों की बर्दाश्तगी का ही नतीजा है कि ममता बनर्जी ने हाल ही में बांग्लादेश से लगी सीमा के 600 किलोमीटर इलाके पर कंटीले तारों की बागड़ लगाने से बीएसएफ को रोक दिया… ममता बनर्जी की हिमाकत इतनी बढ़ गई कि वो देश की सुरक्षा के लिए राज्य की जमीन सेना को नहीं देना चाहती…ममता डरती है कि घुसपैठ रुक जाएगी तो फर्जी वोटरों को कहां से लाएगी और कैसे चुनाव जीत पाएगी…ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री बने रहना पूरे देश के लिए खतरनाक है…घुसपैठिए केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहते, पूरे देश में फैलते हैं… हम इक्के-दुक्के ही पकड़ पाते हैं, लेकिन बचे लोग आतंक को फैलाते हैं…ममता की नीयत नासूर बन चुकी है…भाजपा ने सरकारें बहुत बनाईं-बहुत गिराईं, लेकिन यदि यह नहीं मिटाई तो न राम मंदिर की खुशियां रहेंगी… न कश्मीर की आजादी…
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