
नई दिल्ली । बॉलीवुड एक्ट्रेस दिव्या दत्ता (Divya Dutta) इन दिनों अपनी वेब सीरीज (Web Series) चिरैया (Little Bird) को लेकर चर्चा में हैं यह शो एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर आधारित है और दर्शकों को सोचने के लिए मजबूर कर रहा है इसी बीच दिव्या ने एक इंटरव्यू (Interview) में अपनी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया जिसने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया और उन्हें अन्याय के खिलाफ (Against Injustice) खड़े होने का साहस दिया
दिव्या दत्ता ने बताया कि यह घटना उनके बचपन की है जब उनकी बहन के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई थी उन्होंने याद करते हुए कहा कि एक लड़का उनकी बहन को पीछे से चुटकी काटने की कोशिश कर रहा था तभी उन्होंने तुरंत उसे पकड़ लिया और जोरदार थप्पड़ जड़ दिया इस अचानक प्रतिक्रिया से वहां मौजूद लोग चौंक गए लेकिन उसी पल माहौल बदल गया लोग उस लड़के के खिलाफ खड़े हो गए और वह वहां से भाग गया
दिव्या ने इस पूरे अनुभव को अपनी परवरिश से जोड़ते हुए कहा कि यह आत्मविश्वास उन्हें अपनी मां से मिला था उनकी मां ने हमेशा उन्हें सिखाया कि गलत को सहना नहीं बल्कि उसका सामना करना चाहिए यही वजह रही कि उस समय उन्होंने बिना डरे तुरंत कदम उठाया और अपनी बहन की रक्षा की
उन्होंने एक और घटना का जिक्र किया जब स्कूल से घर लौटते समय एक लड़का उन्हें बार बार परेशान करता था जब उन्होंने यह बात अपनी मां को बताई तो उनकी मां ने अगले ही दिन उस स्थिति का सामना करने का फैसला किया वे उसी गली में कुछ लोगों के साथ खड़ी रहीं और उस लड़के का सीधे सामना किया इस घटना ने दिव्या को सिखाया कि डर को मन में जगह देने से समस्या खत्म नहीं होती बल्कि उसका सामना करने से ही समाधान निकलता है
दिव्या दत्ता का मानना है कि ऐसे अनुभव ही इंसान को मजबूत बनाते हैं उन्होंने कहा कि यही सीख उनके प्रोफेशनल जीवन में भी काम आई फिल्म इंडस्ट्री में जहां हर कदम पर फैसले लेने होते हैं वहां धैर्य और अपनी सीमाओं की समझ बेहद जरूरी है उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने करियर में कभी भी जल्दबाजी में फैसले नहीं लिए बल्कि उन प्रोजेक्ट्स का इंतजार किया जो उनके मूल्यों के अनुरूप थे
उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में रिश्ते और छवि बहुत तेजी से बनती और बिगड़ती है ऐसे में कई बार ना कहना मुश्किल होता है लेकिन सही फैसले लेना ही लंबे समय में फायदा पहुंचाता है दिव्या के अनुसार शालीनता के साथ अपनी बात रखना और बिना विवाद के अपनी सीमाएं तय करना एक कला है जो अनुभव के साथ विकसित होती है
उनकी यह कहानी सिर्फ एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं बल्कि एक मजबूत संदेश है कि साहस और सही परवरिश इंसान को हर मुश्किल के सामने खड़ा होने की ताकत देती है और यही आत्मविश्वास जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की राह बनाता है
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