नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध (War in West Asia) के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। समुद्री मार्गों (Sea routes) में व्यवधान और बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश के पास कच्चे तेल और ईंधन का पर्याप्त भंडार है और किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी पूरी है।
केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत कच्चे तेल और ईंधन आपूर्ति के मामले में मजबूत स्थिति में है। उन्होंने यह बात CNBC-TV18 India Business Leaders Awards 2026 समारोह के दौरान कही।
गोयल ने कहा कि देश में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई है। सरकार के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से चल रही है।
उन्होंने कहा, “कच्चे तेल और ईंधन के मामले में भारत की स्थिति काफी अच्छी है। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी तैयारी की गई है।”
सरकार ने संभावित संकट को देखते हुए केरोसिन का उत्पादन भी बढ़ा दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि एलपीजी आपूर्ति में देरी होती है तो आम लोगों के पास खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध रहे।
इसके साथ ही भारत अपनी एलपीजी और एलएनजी की जरूरतों को विभिन्न देशों से आयात के जरिए पूरा कर रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
इस बीच Donald Trump ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz की सुरक्षा को लेकर कई देशों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इस क्षेत्र में जहाज भेजने का आग्रह किया है।
United States और Israel द्वारा 28 फरवरी को Iran के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष और फैल गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग में बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
हालांकि भारत सरकार का कहना है कि फिलहाल देश के पास पर्याप्त तेल भंडार और वैकल्पिक आयात स्रोत मौजूद हैं, जिससे किसी संभावित संकट का सामना किया जा सकता है।
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