
नई दिल्ली: बिस्तर पर लेटा बेजान बेटा, उसके पास बैठी है मां जो पिछले 13 वर्षों से उसकी सेवा कर रही है. कभी वो बेटे का माथा चूमती है. कभी उसे सहलाती है, उसे निहारते निहारते कब मां की आंखों में आंसू भर जाते हैं, पता ही नहीं चलता. पिता भी बार-बार जाकर कमरे में झांकते हैं, कुछ कहना चाहते हैं लेकिन गला रुंध जाता है. रिश्तेदार और आसपास के लोग आकर ढांढ़स बंधाते हैं लेकिन इसमें से कई लोग खुद ही रो पड़ते हैं. कहानी हरीश राणा की जिनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की मंजूरी दे दी है.
हरीश के माता-पिता को इस बात का संतोष है कि उनके बेटे को इस अंतहीन पीड़ा से जल्द ही निजात मिल जाएगी. लेकिन बेटा तो बेटा होता है. इंजीनियरिंग के दौरान चौथी मंजिल से गिरने के बाद राणा परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा,जीवन भर की पूंजी इलाज में खर्च हो गई, परिवार अर्श से फर्श पर आ गया. लेकिन यह सोचकर कि बेटे की सांसें कुछ दिनों में थम जाएंगी मन बैठ जाता है. इस दर्द को एक माता- पिता ही समझ सकते हैं. अब उनके घर की दीवारें खामोश हैं, कमरों में धीमी आवाज में बातें हो रही हैं और हर चेहरे पर एक ही सवाल है. अब आगे क्या और कैसे होगा? हरीश को आज या कल तक एम्स में भर्ती कराया जाएगा, जहां उन्हें पेलिएटिव केयर में रखा जाएगा, लेकिन अस्पताल जाने से पहले घर का हर पल परिवार के लिए बेहद भावुक हो गया है.
पिता अशोक राणा मीडिया से ज्यादा बात नहीं कर पा रहे. जब भी कोई उनसे सवाल करता है, उनकी आंखें भर आती हैं. वे बस इतना ही कहते हैं कि13 साल से हम कोशिश कर रहे थे कि हमारा बेटा ठीक हो जाए, लेकिन अब उसकी पीड़ा देखकर दिल टूट जाता है. अब कोर्ट के आदेश के बाद सबकुछ भगवान के सहारे पर छोड़ दिया है.
रक्षाबंधन का वो दिन जिसने सब बदल दिया
अशोक राणा बताते हैं कि साल 2013 का रक्षाबंधन उनके परिवार के लिए कभी न भूलने वाला दिन बन गया. उस दिन हरीश कॉलेज के जिस हॉस्टल पीजी में रहते थे, उसकी चौथी मंजिल से गिर गए. हादसा इतना गंभीर था कि उनके सिर और कमर में गहरी चोट आई. तब उनको उम्मीद यही थी कि कुछ दिन के इलाज के बाद बच्चा ठीक हो जाएगा. इसी उम्मीद के सहारे परिवार ने इलाज शुरू कराया, लेकिन पहले कुछ दिन बीते, फिर कुछ हफ्ते और साल… लेकिन हरीश की हालत में सुधार ही नहीं हुआ और वह हादसे के बाद से बिस्तर से उठ ही नहीं पाया
कई सालों तक अस्पतालों के चक्कर
हरीश के साथ हुए हादसे को 13 साल हो गए. उनके इलाज के लिए परिवार ने शायद ही कोई बड़ा अस्पताल छोड़ा हो. हरीश का इलाज पीजीआई चंडीगढ़, एम्स दिल्ली, आरएमएल, अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों में कराया गया, हर बार परिवार नई उम्मीद लेकर डॉक्टरों के पास गया. हर बार उन्हें लगा कि शायद इस बार कोई रास्ता निकल आएगा. लेकिन वक्त के साथ उम्मीदें कमजोर होती चली गईं. इलाज लंबा चला तो पैसा भी खर्च हुआ और कई लाख रुपये इलाज में लगते रहे.
इलाज के लिए बेच दिया तीन मंजिला मकान
अशोक राणा पहले एक बड़े होटल में शेफ थे,. नौकरी से मिलने वाली पेंशन से किसी तरह घर चलता था, लेकिन बेटे के इलाज में खर्च इतना बढ़ता गया कि परिवार को अपना सब कुछ दांव पर लगाना पड़ा. अशोक राणा बताते हैं कि सितंबर 2021 में उन्होंने दिल्ली के महावीर एंक्लेव में अपना तीन मंजिला मकान भी बेच दिया. सोचा था बेटा ठीक हो जाएगा, लेकिन वह ठीक नहीं हो पाया और लंबे इलाज के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति भी खराब हो कई है.
बेटे की पीड़ा देखकर लिया सबसे कठिन फैसला
13 साल से बेटे को बिस्तर पर तड़पते देखना किसी भी माता-पिता के लिए आसान नहीं होता. हरीश की हालत ऐसी हो चुकी है कि वह बस बिस्तर पर पड़े रहते हैं. न कोई प्रतिक्रिया न किसी से बोल पाना, कोमा में रहने के कारण बिस्तर पर पड़े पड़े शरीर में घाव हो गए हैं. पिता से लेकर मां और छोटा भाई सब हरीश की सेवा करते हैं. भाई सुबह 5 बजे उठता है और फिजियोथेरेपी करता है. मां भी पूरे दिन ध्यान रखती हैं. पिता अशोक राणा घर के पास ही एक स्टेडियम के बाहर प्रोष्टिक आहार की शॉप चलाते हैं. हरीश को देखते देखते 13 साल हो गए, अब उसकी पीड़ा परिवार वालों से देखी नहीं जाती है. परिवार का कहना है कि अब वे चाहते हैं कि हरीश को इस पीड़ा से मुक्ति मिले. इसी वजह से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
हरीश के अंग जरूरतमंद को मिल सकें
हरीश के पिता चाहते हैं कि शरीर त्यागने के बाद हरीश के अंग किसी जरूरतमंद को जीवन दे सकें तो अच्छा है अशोक राणा कहते हैं कि अगर हमारे बेटे के अंग किसी और को जिंदगी दे दें, तो हमें लगेगा कि उसका जीवन व्यर्थ नहीं गया.
एम्स में पेलिएटिव केयर में रखा जाएगा
परिवार के अनुसार हरीश को जल्द ही दिल्ली एम्स में भर्ती कराया जाएगा. वहां उन्हें ऑन्कोएनेस्थीसिया और पेलिएटिव मेडिसिन विभाग में रखा जाएगा, जहां गंभीर और असाध्य बीमारी से जूझ रहे मरीजों को दर्द से राहत और देखभाल दी जाती है. अभी फिलहाल घर में हर कोई बस यही कोशिश कर रहा है कि हरीश के साथ जितना समय है, उसे प्यार और अपनापन देकर बिताया जाए.
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