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भारतीय सेना का ऐतिहासिक पराक्रम: 49 सदस्यीय दल ने एवरेस्ट फतह कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

February 09, 2026

हल्द्वानी। भारतीय सेना (Indian Army) ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) पर अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness Book of World Records) में अपना नाम दर्ज करा लिया है। सेना की एडवेंचर विंग के 49 सदस्यीय विशाल दल ने 27 मई 2025 को सफलतापूर्वक एवरेस्ट शिखर पर चढ़ाई की। यह अभियान अब तक का दुनिया का सबसे बड़ा संगठित एवरेस्ट पर्वतारोहण दल माना गया है।

इस ऐतिहासिक अभियान का नेतृत्व उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी ने किया। उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय सेना के इस दल को 22 जनवरी 2026 को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा “विश्व का सबसे बड़ा एवरेस्ट पर्वतारोहण दल” घोषित किया गया। इस उपलब्धि का आधिकारिक प्रमाणपत्र सेना को हाल ही में पिछले शुक्रवार को प्राप्त हुआ है।



  • उत्तराखंड के चार पर्वतारोही रहे शामिल

    इस अभियान दल में भारतीय सेना के 22 प्रशिक्षित पर्वतारोही और नेपाल के 27 अनुभवी शेरपा शामिल थे। खास बात यह रही कि इन 22 भारतीय पर्वतारोहियों में से चार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र से थे, जिससे राज्य में इस सफलता को लेकर विशेष गर्व का माहौल है। यह अभियान भारतीय सेना के प्रतिष्ठित ‘सिल्वर जुबली एवरेस्ट अभियान’ के तहत संचालित किया गया।

    कठिन हालात में दिखाई अदम्य हिम्मत

    यह पर्वतारोहण अभियान वर्ष 2000 में भारतीय सेना द्वारा किए गए अंतिम एवरेस्ट अभियान की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। दल अप्रैल 2025 के मध्य भारत से रवाना हुआ और 23 अप्रैल 2025 को एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचा। इसके बाद पर्वतारोहियों ने कैंप-1 से कैंप-4 तक चरणबद्ध चढ़ाई करते हुए अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं, खराब मौसम और ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना किया।

    26 मई की देर रात अंतिम शिखर अभियान शुरू हुआ और तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद 27 मई 2025 की सुबह पूरे दल ने एक साथ माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचकर तिरंगा फहराया।

    साहस और टीमवर्क का प्रतीक बना अभियान

    लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी ने इस उपलब्धि को भारतीय सेना के साहस, कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन, मजबूत टीम भावना और भारत-नेपाल के बीच उत्कृष्ट सहयोग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड न केवल सेना की साहसिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि दृढ़ संकल्प और समन्वय से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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