
नई दिल्ली: भारत सरकार ने कल मंगलवार को बताया कि पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ “हेट स्पीच, नस्लीय अपमान, उत्पीड़न और भेदभाव” से जुड़ी घटनाओं पर केंद्रीकृत कोई डेटा नहीं रखा जाता है, साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि पुलिसिंग और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. सरकार का कहना है कि वह इस तरह के मामलों को लेकर राज्यों को दिशा-निर्देश देती रहती है.
लोकसभा में असम से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के एक सवाल के जवाब में, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, रजिस्ट्रेशन, मामले की जांच और अपराधियों पर केस चलाने की जिम्मेदारी राज्यों की है. उन्होंने कहा, “पुलिस और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं. राज्य सरकारें अपने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के जरिए अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, रजिस्ट्रेशन करने और जांच करने, और अपराधियों पर केस चलाने के लिए जिम्मेदार हैं.”
गृह राज्य मंत्री राय ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त अपराध आंकड़ों को अपनी “क्राइम इन इंडिया” रिपोर्ट में संकलित और प्रकाशित करता है, जहां 2023 तक के आंकड़े मौजूद हैं. हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा, “पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के खिलाफ हेट स्पीच, नस्लीय टिप्पणी, उत्पीड़न और भेदभाव की घटनाओं पर आंकड़ें केंद्रीय रूप से नहीं रखे जाते हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा कानूनी प्रावधान किसी भी तरह के हेट कमेंट्स, हाव-भाव और नस्लीय हरकतों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं, जिनमें पूर्वोत्तर के लोगों को निशाना बनाने वाले कृत्य भी शामिल हैं. मंत्री ने सुरक्षा और भेदभाव से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया
उठाए गए इन कदमों के तहत इनमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह जारी करना, शिकायतों को संभालने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करना, और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संवेदनशील बनाना शामिल है. उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विशेष पुलिस इकाई (Special Police Unit for North East Region, SPUNER) जैसी पहल शुरू की गई है, साथ ही समर्पित हेल्पलाइन और ई-मेल ID, शिकायतों के पंजीकरण और पीड़ितों को मदद दिलाने की सुविधा के लिए शुरू की गई हैं.
नित्यानंद राय ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद गठित 3 सदस्यीय निगरानी समिति, देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों से संबंधित नस्लीय भेदभाव और शिकायत निवारण के मुद्दों की नियमित रूप से समीक्षा करती रहती है.
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