
नई दिल्ली. दुनिया की ऑटोमोबाइल कंपनियों (Automobile companies) के लिए भारत (India) अब सिर्फ गाड़ियां बेचने का बाजार नहीं, बल्कि एक बड़े ऑटो हब (Auto Hub) के रूप में डेवलप हो रहा है. जहां सिर्फ गाड़ियां बेची नहीं जाती हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर उनकी मैन्युफैक्चरिंग कर उन्हें दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाया जा रहा है. अब दुनिया की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल हुंडई मोटर ग्रुप ने भारत पर बड़ा दांव चला है. कंपनी ने भारत में आने वाले 6 सालों में 1.55 बिलियन डॉलर (करीब 1,47,277 करोड़ रुपये) निवेश करने का ऐलान किया है.
प्रधानमंत्री (PM) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और हुंडई मोटर ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन ईइसुन चुंग की 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद इस महानिवेश का ऐलान किया गया. कंपनी के इस कदम से भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होने और देश को ग्लोबल ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की बात कही है. यह पैसा मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने, नई टेक्नोलॉजी डेवलप करने, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और सप्लायर नेटवर्क को बेहतर करने पर खर्च किया जाएगा.
हुंडई मोटर ग्रुप के मुताबिक, भारत कंपनी के लिए बेहद ही अहम बाजार है. कंपनी यहां अपने निवेश को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए एक अलग इन्वेस्टमेंट यूनिट बनाने की योजना बना रही है. यह यूनिट निवेश से जुड़े फैसलों, दूसरी कंपनियों के साथ साझेदारी और लोकल सप्लायर नेटवर्क बढ़ाने पर काम करेगी.
कंपनी का कहना है कि, इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा हुंडई और किआ इंडिया के वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर खर्च किया जाएगा. कंपनी का मकसद आने वाले सालों में वाहनों की बढ़ती मांग को पूरा करना, लोकल लेवल पर पार्ट्स की खरीद और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना है. इसके साथ ही भारत का ग्लोबल एक्सपोर्ट नेटवर्क भी बढ़ेगा. क्योंकि यहां पर बनी गाड़ियां केवल यहां ही नहीं बेची जाएंगी, बल्कि उन्हें दूसरे देशों में एक्सपोर्ट भी किया जाएगा.
R&D पर खर्च होंगे 6,200 करोड़ रुपये
हुंडई मोटर ग्रुप भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D को बेहतर करने के लिए करीब 700 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 6,200 करोड़ रुपये का निवेश करने की भी योजना बना रहा है. इसमें एक व्हीकल टेस्टिंग ट्रैक तैयार करने की योजना भी शामिल है. इससे कंपनी को इंडियन रोड कंडिशन के हिसाब से गाड़ियों की टेस्टिंग और नई टेक्नोलॉजी को डेवलप करने में मदद मिलेगी.
कंपनी का कहना है कि इस निवेश से भारत में रिसर्च का बेहतर माहौल तैयार होगा, लोकल इंजीनियरों और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. और नेक्स्ट जेनरेशन ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी पर काम तेज किया जा सकेगा. इलेक्ट्रिक वाहनों और फ्यूचर मोबिलिटी से जुड़ी तकनीकों के विकास में भी यह निवेश अहम साबित हो सकता है.
हुंडई इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल फाइनेंसिंग, पुरानी गाड़ियों की रीसाइक्लिंग और मोबिलिटी सर्विसेज जैसे नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाशेगी. इन क्षेत्रों में इन्वेस्टमंट से कंपनी को अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने और बदलते ऑटोमोबाइल बाजार की जरूरतों के मुताबिक नई सर्विसेज डेवलप करने में मदद मिल सकती है.
हुंडई मोटर ग्रुप फिलहाल भारत में 24,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है. भारत में हुंडई और किआ की फैक्ट्रियों का सालाना उत्पादन क्षमता तकरीबन 14 लाख से ज्यादा वाहनों का है. कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग फेसिलिटी चेन्नई, पुणे और अनंतपुर में हैं. अब इस बड़े इन्वेस्टमेंट से मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और सप्लायर नेटवर्क में रोजगार के नए मौके पैदा होने की उम्मीद है.
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