
वॉशिंगटन. पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) को कड़ी चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस (White House) ने कहा है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल और सामान की आवाजाही रोकने की कोशिश करता है तो उसे भारी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका का कहना है कि मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि दुनिया के इस अहम समुद्री रास्ते को बंद नहीं होने दिया जाएगा।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि अभी तक अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी तेल टैंकर या जहाज को एस्कॉर्ट नहीं किया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना यह कदम उठा सकती है। अमेरिका ने साफ किया कि समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना उसकी प्राथमिकता है।
ईरान को अमेरिका ने क्या सख्त संदेश दिया?
व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल या सामान की आवाजाही रोकने की कोशिश की तो उसे अब तक से 20 गुना ज्यादा ताकतवर जवाब दिया जाएगा। अमेरिका ने कहा कि उसकी सेना और सहयोगी देश इस समुद्री रास्ते को खुला रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना ने टैंकर को एस्कॉर्ट किया?
कैरोलिन लेविट ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह दावा किया गया था कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकाला है। लेकिन व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया गया है। हालांकि अगर हालात बिगड़ते हैं तो अमेरिकी नौसेना जहाजों की सुरक्षा के लिए आगे आ सकती है।
तेल बाजार को लेकर अमेरिका ने क्या कदम उठाए?
व्हाइट हाउस ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही अमेरिका ने कुछ तेल से जुड़े प्रतिबंधों में अस्थायी छूट भी दी है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनी रहे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि तेल और गैस की कीमतों में हाल में जो बढ़ोतरी हुई है वह अस्थायी है और जल्द ही हालात सामान्य हो सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां आवाजाही रुकती है तो पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
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