
इन्दौर। आईआईटी इंदौर (IIT Indore) लगातार नवाचार और नए अनुसंधान के लिए प्रयासरत है। देश में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं (healthcare), नए अनुसंधान आदि व्यवस्थाओं में डिजिटल (digital) प्लेटफार्म से जोड़ने के लिए डिजिटल हेल्थ केयर सिस्टम तैयार किया है, जो चिकित्सा के नवाचारों को और ज्यादा बेहतर बनाएगा। इससे नए अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग दिशा 2 के नेशनल मिशन के अंतर्गत आईआईटी इंदौर दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन- टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन रिसर्च पार्क द्वारा कार्यान्वित है, जिसमें देश में स्केलेबल और योग्य हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। दिशा 2 के लिए देशभर से 286 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 21 स्टार्टअप और 29 परियोजनाओं का चयन किया गया। इसके अतिरिक्त, स्टार्टअप और परियोजनाओं में लगभग 15 करोड़ रुपए की समग्र फंडिंग सहायता के साथ 6 फैलोशिप प्रदान की गईं। इसी के तहत आईआईटी इंदौर की कई पहलों का समर्थन किया गया, जो डिजिटल हेल्थकेयर इनोवेशन में संस्थान की भूमिका को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इन्हीं को चिह्नित करने के लिए, आईआईटी इंदौर में प्रवर्तकों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की उपस्थिति में दिशा 2.0 पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह के माध्यम से उत्कृष्ट स्टार्टअप, परियोजनाओं और फैलो को उनकी नवाचार उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण देते हुए आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन के निदेशक मंडल के अध्यक्ष और आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास एस. जोशी ने स्थानांतरणीय अनुसंधान और सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, दिशा 2 शैक्षणिक अनुसंधान को प्रभावशाली स्वास्थ्य समाधान में बदलने की हमारी प्रतिबद्धता का उदाहरण है। शिक्षाविदों, चिकित्सकों और उद्योग को एक साथ लाकर, कार्यक्रम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप एक मजबूत और सतत डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद कर रहा है। मुख्य उदबोधन लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल एम्स रायपुर ने दिया, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवा पहुंच और नैदानिक परिणामों में सुधार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डाटा एनालिटिक्स जैसी डिजिटल प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में उभरती डिजिटल हेल्थकेयर प्रौद्योगिकियों, प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों, चिकित्सक-इनोवेटर इंटरेक्शन से लेकर व्यावसायीकरण पर सत्र पर पैनल चर्चाएं भी की गईं।