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ईरान-इजरायल जंग का असर: सेंसेक्स 7,000 अंक से ज्यादा टूटा, निवेशकों के ₹37 लाख करोड़ डूबे

March 20, 2026

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War) के बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बाजार में लगातार बिकवाली हो रही है, जिससे निवेशकों (Investors) को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

27 फरवरी से 19 मार्च के बीच BSE Sensex करीब 7,080 अंक गिरकर 81,287 से 74,207 के स्तर पर आ गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 2,176 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान बाजार में घबराहट और निवेशकों का भरोसा कमजोर होता नजर आया।

₹37 लाख करोड़ की संपत्ति साफ
पश्चिम एशिया संकट के बाद निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹37 लाख करोड़ की गिरावट आई है। अकेले गुरुवार को ही करीब ₹12.87 लाख करोड़ का नुकसान हुआ, जो पिछले दो वर्षों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में से एक माना जा रहा है।


  • कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी वजह
    तेल की कीमतें 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से बाजार पर दबाव बढ़ा है। महंगाई बढ़ने की आशंका के साथ कंपनियों की लागत में इजाफा हो रहा है, जिससे निवेशकों ने दूरी बनानी शुरू कर दी है।

    वैश्विक बाजार भी दबाव में
    इस संकट का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के बाजारों में भी गिरावट देखी जा रही है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भारतीय बाजार की गिरावट को और तेज कर दिया है।

    केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख
    Federal Reserve ने ब्याज दरों को 3.5%–3.75% पर बरकरार रखा है और संकेत दिया है कि महंगाई नियंत्रित होने तक राहत नहीं मिलेगी। इसी तरह Bank of England और European Central Bank ने भी सख्ती बनाए रखी है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    20 दिनों में 9% तक गिरावट
    पिछले 20 दिनों में सेंसेक्स करीब 8.71% और निफ्टी 8.65% तक लुढ़क चुके हैं। ब्रोकरेज फर्म Nomura के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो FY27 में कंपनियों की कमाई में 10–15% तक गिरावट आ सकती है।

    रिकॉर्ड में शामिल गिरावट
    2026 की सबसे खराब शुरुआतों में शामिल
    1 जनवरी से 16 मार्च के बीच सेंसेक्स 11.4% गिरा
    पिछले 47 वर्षों में पांचवीं सबसे कमजोर शुरुआत

    इससे पहले 2020 (कोरोना संकट) और 2008 (वैश्विक आर्थिक संकट) के दौरान इससे बड़ी गिरावट देखी गई थी। मौजूदा हालात में विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

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