
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में गेहूं खरीदी (Wheat) एक बार फिर टल गई है, जिससे किसानों (Farmers) की चिंता बढ़ गई है। पहले 16 मार्च से शुरू होने वाली खरीदी को 1 अप्रैल तक बढ़ाया गया था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दिया गया है।
इस देरी की मुख्य वजह बारदाने (पीपी और एचडीपीपी बैग) की भारी कमी बताई जा रही है। ये बैग पेट्रोलियम उत्पादों से बनते हैं और हालिया ईरान युद्ध के कारण पेट्रोलियम सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर बैग्स के उत्पादन और आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे गेहूं भंडारण की व्यवस्था बाधित हो गई है।
सीहोर जिले के किसान, जो शरबती गेहूं के लिए मशहूर हैं, इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। रफीकगंज के किसान अवध नारायण के अनुसार, उन्होंने 20 एकड़ में गेहूं की फसल लगाई है, लेकिन इस बार कटाई के बाद भी खरीदी शुरू नहीं हो पाई है। वहीं किसान नरेश परमार का कहना है कि फसल कटे करीब एक महीना हो चुका है और अब रोज उसकी निगरानी करनी पड़ रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल गेहूं खरीदी के लिए लगभग 15.60 करोड़ बारदानों की जरूरत है, जबकि अभी केवल 5.50 करोड़ बैग ही उपलब्ध हैं। यानी करीब 10 करोड़ से ज्यादा की कमी बनी हुई है। वेयरहाउस संचालकों का कहना है कि जूट और पीपी दोनों प्रकार के बैग समय पर नहीं मिल सके, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
हालांकि सरकार ने बारदाने की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं और जल्द सप्लाई सामान्य होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। कुणाल चौधरी ने सवाल उठाया है कि हर साल मार्च में खरीदी होती है, फिर भी समय रहते तैयारी क्यों नहीं की गई।
इस देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिन्होंने कर्ज लेकर खेती की है। अब फसल बेचने में हो रही देरी के कारण उन्हें आर्थिक दबाव और भंडारण की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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