
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव (Rising Tensions in the Middle East) का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था (India’s Economy) पर भी दिखने लगा है। देश के चीफ इकनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन (Chief Economic Advisor V. Anantha Nageswaran) ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात भारत के आर्थिक संकेतकों पर व्यापक असर डाल सकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ग्रोथ, महंगाई और फाइनेंशियल बैलेंस पर इसका दबाव बढ़ सकता है।
सीईए के मुताबिक, मौजूदा हालात में देश की आर्थिक वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा। खासकर ईंधन से जुड़े सेक्टर में लागत बढ़ने से कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
वित्त मंत्रालय ने भी जताई चिंता
वित्त मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में भी कहा गया है कि आने वाले समय में आर्थिक स्थिति अनिश्चित बनी रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संकट, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में बाधाएं भारत की ग्रोथ के लिए जोखिम पैदा कर रही हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ा खतरा?
भारत एक बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और पश्चिम एशिया के देशों के साथ उसका व्यापार और निवेश गहराई से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस का भी भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है। ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है।
सरकार के पास क्या है प्लान?
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और घरेलू मांग इस असर को कुछ हद तक कम कर सकती है। सरकार ऊर्जा सोर्स में विविधता लाने, महंगाई को कंट्रोल करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
तेल की कीमतें बनी बड़ी चिंता
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। अगर तेल और गैस महंगे होते हैं, तो इसका असर परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा।
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