
नई दिल्ली। बुधवार देर रात ग्रीनलैंड (Greenland) के मुद्दे पर ट्रंप (Trump) की नरम पड़ती बोली से गुरुवार सुबह को चांदी के बाजार (Silver market) में जो हुआ, उसने कई निवेशकों को हैरान कर दिया। एमसीएक्स पर चांदी भले ही करीब 4% फिसली हो, लेकिन चांदी के ईटीएफ (ETF) में गिरावट को भूचाल कहना सही होगा। किसी ईटीएफ में 20% तो किसी में 24% तक की गिरावट देखने को मिली। सवाल यही है कि जब एमसीएक्स (MCX) में चांदी इतनी नहीं टूटी, तो ईटीएफ में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
निवेश का माध्यम है ईटीएफ
एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ निवेश के ऐसे तरीके हैं, जिनमें एकत्रित धनराशि को कमोडिटी, स्टॉक, बॉन्ड आदि जैसी विभिन्न परिसंपत्ति श्रेणियों में निवेश किया जाता है। सिल्वर ईटीएफ अपनी धनराशि को भौतिक चांदी या चांदी से संबंधित उपकरणों में निवेश करते हैं। सिल्वर ईटीएफ का नेट एसेट वैल्यू सीधे चांदी की कीमत पर निर्भर करता है।
सिल्वर एमसीएक्स पर 4% की गिरावट
22 जनवरी को एमसीएक्स पर चांदी वायदा भाव करीब 4% टूटकर ₹3,05,753 प्रति किलो तक आ गए। यह गिरावट ऑल टाइम हाई से करीब ₹30,000 रुपये है। इसकी सबसे बड़ी वजह वैश्विक तनाव में नरमी मानी जा रही है। अमेरिका और ग्रीनलैंड को लेकर टकराव की आशंका कम होने से सेफ-हेवन डिमांड घटी और मजबूत डॉलर ने भी चांदी पर दबाव डाला।
चांदी के ईटीएफ 20% से 24% तक टूटे भाव
जहां एमसीएक्स सिल्वर 4% फिसली, वहीं सिल्वर ईटीएफ में गिरावट कहीं ज्यादा तेज रही। टाटा सिल्वर ईटीएफ करीब 24% टूटकर ₹25.56 पर आ गया। एडलवाइस सिल्वर ईटीएफ और मिराई एसेट सिल्वर ईटीएफ में करीब 22% की गिरावट आई। 360 वन सिल्वर ईटीएफ 21% और निप्पन इंडिया सिल्वर ईटीएफ करीब 20% टूट गया। यही वजह है कि ईटीएफ में निवेश करने वाले सबसे ज्यादा परेशान नजर आए।
एमसीएक्स और ईटीएफ में अंतर की वजह
जानकारों के मुताबिक, यह गिरावट सिर्फ ट्रंप की ग्रीनलैंड पर पकड़ ढीली करने वाले बयान की वजह से नहीं है। भारतीय बाजार में चांदी बजट से जुड़ी अटकलों के चलते अतिरिक्त प्रीमियम पर बिक कर रही थी। आयात शुल्क बढ़ने की अफवाहों और पॉलिसी संकेतों की उम्मीद में एमसीएक्स सिल्वर ने कॉमैक्स के मुकाबले काफी ज्यादा तेजी दिखाई थी।
एक वक्त पर वायदा बाजार में भारतीय चांदी की कीमत करीब 107 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी, जबकि कॉमैक्स पर यह करीब 94 डॉलर के आसपास थी। यानी लगभग 13 डॉलर का असामान्य प्रीमियम। जब यह साफ हो गया कि फिलहाल कोई ड्यूटी राहत नहीं मिलने वाली, तो यह प्रीमियम तेजी से खत्म होने लगा और ईटीएफ पर दबाव बढ़ गया।
ईटीएफ में गिरावट ज्यादा क्यों दिखी
चांदी के ईटीएफ घरेलू हाजिर भाव, निवेशकों के निवेश प्रवाह पर ऊपर-नीचे होते हैं। जब रिटेल निवेशक मुनाफावसूली के लिए एक साथ निकलते हैं, तो ईटीएफ यूनिट्स पर बिकवाली का दबाव ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि एमसीएक्स चांदी के मुकाबले ईटीएफ में गिरावट ज्यादा और तेज दिखी।
अभी सिल्वर ईटीएफ खरीदने का सही मौका या नहीं?
जानकार मानते हैं कि यह गिरावट पूरी तरह घबराहट वाली बिकवाली जैसी नहीं है, बल्कि मुनाफावसूली और जोखिम को संतुलित करने का नतीजा है। इक्विटी बाजारों में तेजी लौटने से भी इनसे पैसा निकला है। हालांकि, मांग, सेंट्रल बैंक की खरीद और महंगाई से बचाव जैसे कारक अभी भी मजबूत हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह लंबी अवधि में खरीदारी का मौका हो सकता है, लेकिन अल्प अवधि में सट्टेबाजी से बचना चाहिए।
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