नई दिल्ली। कनाडा में पढ़ाई, नौकरी (Studying and working in Canada) और बेहतर भविष्य की तलाश में जाने वाले भारतीयों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में कनाडा ने 3,323 भारतीय नागरिकों (Indian citizens) को देश से निर्वासित किया है। यह संख्या इतनी बड़ी है कि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों की तुलना में इसे एक अहम बदलाव माना जा रहा है।
कनाडा सीमा सेवा एजेंसी (CBSA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 2025 में पूरे साल निर्वासित किए गए 3,779 भारतीय नागरिकों के करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यानी जिस संख्या तक पहुंचने में पिछले साल पूरा साल लगा था, उसके लगभग करीब कनाडा इस साल महज छह महीनों में पहुंच गया।
भारतीयों के निर्वासन का यह आंकड़ा अमेरिका के मुकाबले भी काफी बड़ा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1 जनवरी से 22 जुलाई 2026 के बीच अमेरिका ने 1,273 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा। वहीं, कनाडा में छह महीने के दौरान निर्वासन की संख्या 3,323 रही।
अमेरिका ने वर्ष 2025 में कुल 3,567 भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया था। यह आंकड़ा 2011 के बाद अमेरिका में भारतीय नागरिकों के निर्वासन का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है।
कनाडा पिछले कुछ समय से अपनी आव्रजन व्यवस्था को अधिक नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार की कोशिश देश में अस्थायी निवासियों की संख्या कम करने की है। इनमें अंतरराष्ट्रीय छात्र और अस्थायी विदेशी कामगार भी शामिल हैं।
इसी नीति के तहत ऐसे लोगों पर कार्रवाई तेज की जा रही है, जिनके पास कनाडा में रहने के लिए वैध दस्तावेज नहीं हैं। सरकार अवैध या नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रवासियों से जुड़े लंबित मामलों को भी जल्द निपटाने पर जोर दे रही है।
2026 के आंकड़ों की खास बात यह है कि इस साल कनाडा से निर्वासित किए गए लोगों में भारतीय नागरिकों की संख्या पहली बार इतनी ऊंची पहुंची है। इससे पहले के पांच वर्षों में मेक्सिको के नागरिक कनाडा से निष्कासित की जाने वाली राष्ट्रीयताओं में शीर्ष पर रहे थे, जबकि भारत दूसरे स्थान पर रहा।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में कनाडा ने 1,424 भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया था। इसके मुकाबले 2026 में छह महीने के भीतर 3,323 भारतीयों का डिपोर्टेशन काफी बड़ा बदलाव है।
कनाडा सरकार ने CBSA को निर्वासन से जुड़े लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में डिपोर्टेशन का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसका सीधा असर उन भारतीयों पर पड़ सकता है, जो कनाडा में पढ़ाई, नौकरी या स्थायी निवास के लिए जाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे आवेदकों के लिए अब इमिग्रेशन नियमों का पूरी तरह पालन करना, दस्तावेजों को सही रखना और वीजा या परमिट की शर्तों को समझना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
कुल मिलाकर, कनाडा की मौजूदा नीति यह संकेत दे रही है कि देश अब आव्रजन व्यवस्था में संख्या बढ़ाने के बजाय नियमों के कड़ाई से पालन और गैर-कानूनी प्रवास पर कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है।
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