नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के बीच आधिकारिक संबंधों में भले ठहराव बना हुआ हो, लेकिन अनौपचारिक ‘ट्रैक-2’ कूटनीति का चैनल सक्रिय है। फरवरी 2026 में दोहा (Queue) में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें बिना औपचारिक घोषणा के संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई। पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले के बाद बढ़ी तल्खी के बीच यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत-पाक के बीच बैक-चैनल संवाद का यह सिलसिला नया नहीं है। दशकों से इस तरह की वार्ताएं चलती रही हैं और एक समय दोनों देशों के बीच करीब 20 समानांतर ट्रैक-2 संवाद भी सक्रिय थे।
क्या है ‘ट्रैक-2’ कूटनीति?
‘ट्रैक-2’ कूटनीति वह अनौपचारिक बातचीत है जिसमें पूर्व अधिकारी, विशेषज्ञ, पत्रकार, कारोबारी और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य राजनीतिक दबाव से दूर रहकर भरोसा कायम करना और संभावित समाधान तलाशना होता है। ‘ट्रैक-2’ शब्द 1981 में अमेरिकी राजनयिक जोसेफ मोंटविले ने दिया था। भारत-पाक के बीच ‘नीमराणा संवाद’ इस श्रेणी की प्रमुख पहल मानी जाती है।
ट्रैक-1 और ट्रैक-1.5 से अंतर
ट्रैक-1: सरकार-से-सरकार औपचारिक वार्ता, जैसे कैंप डेविड समझौता
ट्रैक-1.5: सेवारत अधिकारी अनौपचारिक मंच पर विशेषज्ञों के साथ शामिल
ट्रैक-2: पूरी तरह गैर-सरकारी और गोपनीय संवाद
इन बैठकों की खासियत यह है कि इनके बाद न कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी होती है और न आधिकारिक पुष्टि। इनसे मिले संकेतों का उपयोग सरकारें नीति तय करने में करती हैं।
वैश्विक उदाहरण
1993 के ओस्लो समझौता से पहले नॉर्वे में इजरायली शिक्षाविदों और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के प्रतिनिधियों के बीच इसी तरह की अनौपचारिक बातचीत हुई थी, जिसने बाद में औपचारिक समझौते का रास्ता बनाया।
2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ गया था। हालांकि ट्रैक-2 वार्ताओं ने संवाद बनाए रखा। 2025 में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई, जिसके बाद संपर्क बहाल होने के संकेत मिले।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान प्रयास
2022 में रूस‑यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 मंचों के जरिए यूरोप, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से बातचीत जारी रखी। भारत ने सार्वजनिक रूप से रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए मानवीय समाधान पर जोर दिया।
कनाडा के साथ रिश्तों में नरमी
हरदीप सिंह निज्जर मामले के बाद भारत-कनाडा संबंधों में तनाव बढ़ा था। बाद में ट्रैक-1.5 संवाद के जरिए बातचीत आगे बढ़ी। नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकातों के बाद रिश्तों में सुधार हुआ। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर तक ले जाने और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर चर्चा आगे बढ़ाई।
क्यों अहम है यह कूटनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, जब औपचारिक वार्ता ठप हो जाती है, तब ट्रैक-2 चैनल संवाद की डोर बनाए रखते हैं। भारत-पाक के बीच कतर में हुई हालिया बैठक को भी भविष्य में आधिकारिक बातचीत की जमीन तैयार करने की कोशिश माना जा रहा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved