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राफेल की नई खेप से बढ़ेगी भारत की ताकत, चीन और पाकिस्तान के लिए ये बनेगा ‘काल’

February 12, 2026

नई दिल्ली: भारत (India) ने 114 नए राफेल विमान (Rafale aircraft) खरीदने जा रहा है, सरकार की ओर से इसे मंजूरी मिल गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) की बैठक में इसकी मंजूरी दी. भारत पहले भी राफेल विमान खरीद चुका है. अप्रैल 2025 में 26 राफेल-मरीन जेट के लिए फ्रांस से डील की थी. भारतीय वायुसेना इस समय अपनी सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रही- वह है फाइटर स्क्वाड्रनों की घटती संख्या. वायुसेना को जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है, जबकि उसे पास स्क्वाड्रन हैं, महज 29-30 ही. ऐसे में राफेल विमानों की नई खरीद भारत के ‘टू-फ्रंट वॉर’ की तैयारियों के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाली है.

एक ही मिशन में कई काम
राफेल की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘मल्टी-रोल’ क्षमता है. यह विमान युद्ध के दौरान अपनी भूमिका को पलक झपकते ही बदल सकता है. जैसे अगर राफेल टोही मिशन पर निकला है और अचानक उसे दुश्मन का कोई ठिकाना दिखता है, तो वह बिना समय गंवाए वहीं हमला कर सकता है. इसे अपनी कॉन्फिगरेशन बदलने के लिए वापस बेस पर आने की जरूरत नहीं पड़ती. जरूरत पड़ने पर इसे असम के डिब्रूगढ़ (पूर्वी सीमा) से राजस्थान के जैसलमेर (पश्चिमी सीमा) तक बहुत कम समय में तैनात किया जा सकता है.


  • 14 ‘हार्ड पॉइंट्स’ से लैस
    राफेल विमान 14 ‘हार्ड पॉइंट्स’ से लैस है. यानी इसमें 14 अलग-अलग जगहों पर हथियार लगाए जा सकते हैं. इसकी असली ताकत इसकी मिसाइलें हैं –
    मेट्योर : यह हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों में से एक है. दुश्मन का विमान इस मिसाइल से बच नहीं सकता.
    स्कैल्प : यह हवा से जमीन पर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइल है, जो दुश्मन के बंकरों और ठिकानों को मीलों दूर से तबाह कर सकती है.
    हैमर : यह सटीक निशाना लगाने वाला हथियार है जो किसी भी मौसम में काम कर सकता है.

    दुश्मन को भनक तक नहीं लगेगी
    राफेल में ‘स्पेक्ट्रा’ नाम का एक इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगा है. यह दुश्मन की ओर से आने वाली मिसाइलों को रोक सकता है. इसके अलावा, इसकी ‘डेटा लिंक’ तकनीक इसे दुश्मन के रडारों के लिए ‘साइलेंट’ बना देती है. यानी राफेल हमला कर देगा और दुश्मन को पता भी नहीं चलेगा कि हमला कहां से हुआ.

    फ्रांस एक भरोसेमंद साथी
    भारत का फ्रांस के साथ रक्षा संबंध दशकों पुराना है. 1950 के दशक में ‘तूफानी’ और ‘मिस्टेयर’ से लेकर 1984 में ‘मिराज-2000’ तक, फ्रांस ने हमेशा भारत का साथ दिया है. कारगिल युद्ध में फ्रांस से खरीदे गए मिराज-2000 ने पराक्रम दिखाया था. सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका या ब्रिटेन की तरह फ्रांस ने कभी भारत पर किसी भी तरह का बैन या दबाव बनाने की कोशिश नहीं की.

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