
नई दिल्ली। भारत (India) ने अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में कुछ स्थानों के नाम बदलकर उन्हें चीनी नाम (Chinese name) देने के बीजिंग (Beijing) के कदम को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। भारत ने साफ कहा कि इस तरह के दावे और मनगढ़ंत बातें वास्तविकता को नहीं बदल सकतीं, क्योंकि ये क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन द्वारा भारत के क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्थानों को नए नाम देना एक भ्रामक और अनावश्यक प्रयास है, जिसे भारत पूरी तरह खारिज करता है।
भारत-चीन संबंधों पर पड़ सकता है नकारात्मक असर
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियां दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य और स्थिर बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाती हैं। भारत ने चीन से आग्रह किया कि वह ऐसे कदमों से बचे, जो द्विपक्षीय संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा करें। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये सभी क्षेत्र भारत का अविभाज्य और स्थायी हिस्सा हैं, और इस वास्तविकता को किसी भी तरह के दावों से बदला नहीं जा सकता।
अरुणाचल प्रदेश पर चीन का पुराना दावा
चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता रहा है और इसे “दक्षिणी तिब्बत” (जंगनान) के नाम से संबोधित करता है। बीजिंग 1914 की शिमला संधि और मैकमोहन रेखा को मान्यता नहीं देता और इसे ऐतिहासिक रूप से विवादित बताता है।
वहीं भारत का कहना है कि मैकमोहन रेखा ऐतिहासिक रूप से वैध सीमा है, जिसे ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच सहमति से तय किया गया था और जिसे स्वतंत्र भारत ने भी स्वीकार किया है। भारत यह भी दोहराता है कि इस क्षेत्र पर उसका प्रशासनिक नियंत्रण दशकों से लगातार बना हुआ है और स्थानीय लोग भारतीय नागरिक के रूप में सभी भारतीय दस्तावेजों का उपयोग करते हैं।
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