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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, अमेरिकी राजदूत ने दिया बड़ा बयान

June 03, 2026

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका (India and the United States) के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी राजदूत ने बड़ा बयान दिया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है और अब केवल एक प्रतिशत काम बाकी है। मुंबई में आयोजित सिटी 2026 इंडिया कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि दोनों देश इस समझौते को लेकर बेहद आशावादी हैं और यह डील भारत और अमेरिका दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होगी।

सर्जियो गोर ने आगे कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझेदारी आने वाले समय में दुनिया की दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का चार दिनों तक भारत दौरे पर रहना इस रिश्ते की गंभीरता और गहराई को दिखाता है। गोर ने कहा कि अमेरिका भारत को रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है और दोनों देशों के बीच लगातार भरोसा मजबूत हो रहा है।


  • क्या व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए बड़ा फायदा बनेगा?
    अमेरिकी राजदूत ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते निवेश से रोजगार, तकनीक और उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। गोर के मुताबिक अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां भारत में भारी निवेश कर रही हैं, जिससे भारत की डिजिटल और तकनीकी ताकत और बढ़ेगी।

    सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और दवा उद्योग में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में TRUST पहल शुरू की थी। इस पहल का मकसद रणनीतिक तकनीकों, एआई विकास और भरोसेमंद सप्लाई चेन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली करीब 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से जाती हैं।

    क्या परमाणु और खनिज क्षेत्र में भी मजबूत होंगे रिश्ते?
    अमेरिकी राजदूत ने कहा कि दोनों देश नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में इस क्षेत्र में सहयोग और मजबूत होगा। इसके अलावा भारत और अमेरिका ने हाल ही में क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसका मकसद ऊर्जा और उन्नत तकनीक के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

    क्या चीन जैसे एकाधिकार को चुनौती देना चाहते हैं दोनों देश?
    सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना चाहते हैं ताकि किसी एक देश के दबदबे पर निर्भरता कम हो। उन्होंने कहा कि दोनों देश ऐसे नेटवर्क तैयार कर रहे हैं जो बाजार में दबाव और एकाधिकार की स्थिति को कमजोर कर सकें। माना जा रहा है कि यह कदम वैश्विक रणनीतिक संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

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