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ईरानी हमले में जला जहाज, समुद्र में कूदकर बची जान; भारतीय नाविकों का सोना-पासपोर्ट सब खाक

March 30, 2026

तेहरान। ईरान-इजरायल तनाव (Iran-Israel tensions) के बीच 1 मार्च को ओमान के पास तेल टैंकर (oil tanker) ‘स्काई लाइट’ (sky light) पर हुए मिसाइल हमले में बचे आठ भारतीय नाविकों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। मौत के मुंह से लौटने के बाद अब वे दस्तावेज, मुआवजा और घर लौटने को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। ये नाविक पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के रहने वाले बताए गए हैं और अधिकतर की यह समुद्री क्षेत्र में पहली नौकरी थी।



  • धमाका, आग और समुद्र में छलांग

    नाविकों के अनुसार, सुबह करीब 7 बजे जोरदार धमाका हुआ और जहाज में आग फैल गई। चारों तरफ धुआं भर गया, जिससे जान बचाने के लिए उन्हें लाइफ जैकेट पहनकर समुद्र में कूदना पड़ा। कई नाविकों को तैरना भी नहीं आता था। कुछ ही देर बाद ओमान की नौसेना ने उन्हें बचा लिया। एक नाविक ने बताया कि हम आज भी वही कपड़े पहने हुए हैं, जिनमें समुद्र में कूदे थे, क्योंकि उनका सारा सामान जल गया।

    पासपोर्ट, दस्तावेज और सामान सब नष्ट

    हमले में नाविकों के पासपोर्ट, पहचान पत्र, मोबाइल फोन और निजी सामान जलकर खाक हो गए। दस्तावेज न होने के कारण वे एक सप्ताह से ज्यादा समय तक ओमान में फंसे रहे। बाद में आपातकालीन आउटपास जारी होने पर वे मस्कट के रास्ते 18 मार्च को मुंबई पहुंचे।

    मुंबई पहुंचकर नई दिक्कतें

    मुंबई पहुंचने के बाद भी परेशानियां खत्म नहीं हुईं। नाविकों को नवी मुंबई में ‘साइन-ऑफ’ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, जबकि उनका कहना है कि उनका कॉन्ट्रैक्ट अभी समाप्त नहीं हुआ था। उन्हें बिना ठहरने की व्यवस्था के छोड़ दिया गया, जिसके बाद देर रात उन्हें रहने की जगह मिली।

    शिपिंग कंपनी ने वेतन खातों में जमा कर दिया, लेकिन पहचान पत्र और मोबाइल खो जाने के कारण वे पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं। फिलहाल एक नाविक ही अपने खाते से सभी का खर्च उठा रहा है।

    दस्तावेज दोबारा बनाने की प्रक्रिया

    संबंधित विभागों का कहना है कि नाविकों के खोए दस्तावेज दोबारा बनवाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। मुआवजे पर भी अलग-अलग मामलों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए नाविकों को सुनवाई में शामिल होना होगा।

    ‘यह हमारा दूसरा जन्म’

    घटना से सदमे में आए नाविक अब समुद्री नौकरी छोड़ने का मन बना चुके हैं। उनका कहना है कि वे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गए थे, लेकिन इस हादसे ने उन्हें डरा दिया है। नाविकों ने कहा कि यह उनका दूसरा जन्म है और अब वे सिर्फ अपने गांव लौटकर शांत जीवन जीना चाहते हैं।

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