
नई दिल्ली। भारत में ऑर्गन डोनेशन रेट(India’s organ donation rate) सिर्फ 0.86 प्रति दस लाख है, जो मांग के मुकाबले बेहद कम(extremely low compared to demand) है। इसके कारण हर साल लगभग 5 लाख (approximately 500,000 people)लोग ऑर्गन(access to organs) न मिलने से दम तोड़ देते हैं। वहीं, 82,000 से ज्यादा मरीज वेटिंग लिस्ट(on the waiting list,) में हैं और उनका जीवन इस कमी(lives depend on this shortage.)पर निर्भर है।
क्यों भारत में ऑर्गन डोनेशन कम है?
जागरूकता की कमी: लोगों में ‘ब्रेन डेड’ और ऑर्गन डोनेशन को लेकर सही जानकारी नहीं।
धार्मिक भ्रांतियां: कई परिवार डोनेशन से कतराते हैं।
स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: ग्रामीण और छोटे शहरों में ऑर्गन ट्रांसपोर्टेशन और मेडिकल फैसिलिटी कम।
ब्रेन डेड पहचान में देरी: समय पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता।
ऑर्गन डोनेशन की वेटिंग लिस्ट
किडनी: 60,590 मरीज
लिवर: 18,724 मरीज
हार्ट: 1,695 मरीज
फेफड़े: 970 मरीज
पैनक्रियाज: 306 मरीज
तमिलनाडु मॉडल: भारत के लिए प्रेरणा
तमिलनाडु में ऑर्गन डोनेशन की रेट नेशनल एवरेज से कई गुना अधिक है।
ट्रांसप्लांट अथॉरिटी ऑफ तमिल नाडु जैसी समर्पित संस्थाएं।
अनिवार्य ब्रेन डेड सर्टिफिकेट और पारदर्शी आवंटन प्रणाली।
ऑर्गन डोनर्स का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार।
फ्री ट्रांसप्लांट और ग्रीन कॉरिडोर जैसी सुविधाएं।
ऑर्गन डोनेशन कैसे करें?
नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) रजिस्ट्रेशन करती है।
18+ उम्र के नागरिक notto.abdm.gov.in पर ऑनलाइन या फॉर्म 7 भरकर डोनेट करने का वादा कर सकते हैं।
रजिस्टर्ड डोनर को डोनर कार्ड मिलता है, जो उनके नेक इरादों को दर्शाता है।
ऑर्गन डोनेशन बढ़ाने के लिए जागरूकता फैलाना, स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारना और धार्मिक भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है। तमिलनाडु मॉडल एक प्रेरक उदाहरण है, जो पूरे देश में अपनाया जा सकता है। एक छोटा सा फैसला लाखों जिंदगी बचा सकता है।
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