संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर भारत ने एक बार फिर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र में (UN) भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने कहा कि केवल अस्थायी सदस्य देशों की संख्या बढ़ाना वास्तविक सुधार नहीं माना जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सुधार प्रक्रिया सिर्फ दो साल के कार्यकाल वाली सीटों तक सीमित रही, तो यह अधूरी और प्रभावहीन साबित होगी।
भारत ने कहा कि UNSC की मौजूदा संरचना में असली निर्णय लेने की ताकत स्थायी सदस्य देशों के हाथों में केंद्रित है। ऐसे में केवल अस्थायी सीटें बढ़ाने से शक्ति संतुलन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।
हरीश ने कहा कि कई देश और समूह लंबे समय से सार्थक सुधारों का इंतजार कर रहे हैं। उनके मुताबिक, अस्थायी सदस्यता के विस्तार को ही सहमति का संकेत मान लेना पूरी तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा है, क्योंकि इसके साथ कई शर्तें और व्यापक मुद्दे जुड़े हुए हैं।
भारत ने अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और परिणामोन्मुख बनाने की भी मांग की। हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की अन्य प्रक्रियाओं की तरह यहां भी चर्चा का आधार एक स्पष्ट लिखित प्रस्ताव होना चाहिए, जिस पर सदस्य देश और समूह अपनी राय रख सकें।
उन्होंने सुझाव दिया कि सह-अध्यक्षों को एक ऐसा प्रस्ताव तैयार करना चाहिए, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, चरणबद्ध प्रक्रिया और समयसीमा तय हो। भारत का मानना है कि इससे बातचीत ज्यादा व्यवस्थित और परिणाम देने वाली बन सकती है।
भारत ने यह भी कहा कि स्थायी सदस्यता को लेकर किसी नई व्याख्या की जरूरत नहीं है। हरीश के मुताबिक, United Nations चार्टर के अनुच्छेद 23 में स्पष्ट रूप से स्थायी और अस्थायी सदस्यता का उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि अफ्रीकी समूह, जी4 और एल69 जैसे कई देश भी इसी आधार पर स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग कर रहे हैं। भारत का मानना है कि इस विषय को अनावश्यक रूप से जटिल बनाने की आवश्यकता नहीं है।
भारत ने UNSC में अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया। हरीश ने कहा कि कई देशों ने अफ्रीकी प्रतिनिधित्व बढ़ाने के मॉडल का समर्थन किया है, लेकिन मौजूदा दस्तावेजों में इस समर्थन को पर्याप्त तरीके से नहीं दर्शाया गया।
भारत ने यह भी आपत्ति जताई कि जहां पहले स्थायी सीटों के विस्तार के पक्ष में व्यापक समर्थन की बात कही जाती थी, अब उसे घटाकर “कुछ देशों का समर्थन” बताया जा रहा है, जो वास्तविक स्थिति को सही ढंग से पेश नहीं करता।
भारत ने दोहराया कि वह सुरक्षा परिषद में वास्तविक, संतुलित और प्रभावी सुधारों के लिए गंभीर प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा।
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