
नई दिल्ली । भारत में भगवान हनुमान (Lord Hanuman) के अनेक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन गुजरात (Gujarat) के जामनगर (Jamnagar) स्थित श्री बाल हनुमान संकीर्तन मंदिर अपनी एक अनूठी परंपरा के कारण देश ही नहीं, दुनिया भर में विशेष पहचान रखता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पिछले छह दशकों से लगातार श्रीराम (Lord Rama) के नाम का अखंड संकीर्तन (Kirtan) चल रहा है। यह परंपरा बिना किसी विराम के आज भी उसी श्रद्धा और अनुशासन के साथ जारी है, जिसके कारण इस मंदिर का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Records) में भी दर्ज किया गया है।
जामनगर की प्रसिद्ध लखोटा झील के निकट स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां 1 अगस्त 1964 से लगातार “श्री राम, जय राम, जय जय राम” की रामधुन गूंज रही है। इस संकीर्तन की विशेषता यह है कि दिन और रात के किसी भी समय इसका क्रम नहीं टूटता। भक्त और साधक निर्धारित व्यवस्था के अनुसार बारी-बारी से कीर्तन में शामिल होते हैं और राम नाम का जाप निरंतर जारी रखते हैं।
लगातार वर्षों तक बिना रुके चलने वाली इस रामधुन को दुनिया का सबसे लंबा अखंड संकीर्तन माना गया है। इसी उपलब्धि के आधार पर मंदिर का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। यह सम्मान केवल मंदिर की पहचान नहीं, बल्कि उस सामूहिक श्रद्धा और अनुशासन का भी प्रतीक माना जाता है, जिसे हजारों श्रद्धालु वर्षों से निभाते आ रहे हैं।
मंदिर से जुड़े लोगों का मानना है कि यहां होने वाला अखंड राम नाम संकीर्तन पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास भी प्रचलित है कि इस आध्यात्मिक साधना का प्रभाव जामनगर शहर की सुख-समृद्धि और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। हालांकि यह धार्मिक आस्था का विषय है, लेकिन इसी विश्वास के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और कीर्तन में भाग लेने पहुंचते हैं।
मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। रामनवमी, हनुमान जयंती और विजयदशमी जैसे प्रमुख धार्मिक पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इन अवसरों पर मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में बदल जाता है और दूर-दराज के राज्यों से भी लोग यहां पहुंचते हैं।
इस मंदिर की एक और विशेषता यह है कि इसके द्वार श्रद्धालुओं के लिए दिन-रात खुले रहते हैं। यहां आने वाले भक्त किसी भी समय रामधुन में शामिल होकर भजन-कीर्तन का हिस्सा बन सकते हैं। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से आने वाले श्रद्धालु भी इस अनोखी परंपरा को देखने और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं।
इस पवित्र परंपरा की शुरुआत संत श्री प्रेमभिक्षुजी महाराज ने वर्ष 1964 में की थी। उनके मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह अखंड संकीर्तन आज भी निरंतर जारी है। उनकी प्रेरणा से गुजरात के द्वारका, राजकोट, पोरबंदर, जूनागढ़, महुवा और बिहार के मुजफ्फरपुर सहित कई स्थानों पर भी इसी प्रकार राम नाम के संकीर्तन की परंपरा संचालित की जा रही है। इसके अलावा देश के 40 से अधिक शहरों में नियमित रूप से रामधुन और संकीर्तन के आयोजन होते हैं।
आस्था, अनुशासन और सामूहिक भक्ति का अद्भुत उदाहरण माना जाने वाला श्री बाल हनुमान संकीर्तन मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की निरंतरता का भी प्रतीक बन चुका है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी अनुभव करते हैं, जो इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है।
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