
इंदौर। शहरी सीलिंग की धारा 20 की छूट के दुरुपयोग के मामले में गृह निर्माण संस्थाओं की इन जमीनों को सरकारी घोषित करने की प्रक्रिया पर नए सिरे से मंथन शुरू किया। दरअसल, 4 साल पहले तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने इन संस्थाओं की जमीनों को सरकारी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की और शासन के राजस्व विभाग को भी इस आशय का प्रस्ताव भेजा। त्रिशला और सूर्या गृह निर्माण की जमीनें तो प्रशासन ने अपने आदेश से सरकारी घोषित कर भी दी, तो दूसरी तरफ इस तरह की कुल 180 संस्थाएं चिन्हित की गई, जिनमें शहरी सीलिंग की छूट के प्रावधानों का दुरुपयोग पाया गया। अब कलेक्टर शिवम वर्मा भी नए सिरे से राजस्व विभाग को इन जमीनों को लेकर प्रस्ताव भिजवा रहे हैं, ताकि भूमाफिया अपने कारनामों में सफल नहीं हो पाएं।
पूर्व में शासन ने तीन बार ऑपरेशन भूमाफिया चलवाकर गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनों में हुई धोखाधड़ी और घोटालों की जांच करवाई और कई चर्चित भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ उन्हें जेल भी जाना पड़ा। यहां तक कि बाद में आयकर और ईडी ने भी इसी मामले में कार्रवाई की। अभियान के वक्त जो प्रमुख दागी गृह निर्माण संस्थाएं चिन्हित की गई उनकी जमीनों को खुर्द-बुर्द करने, भूखंड पीडि़तों की बजाय रसूखदारों को जमीनें बेचने के लेकर तमाम गड़बडिय़ां सामने आई, जिसके चलते मुंबई हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने 04.11.2022 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया, जिसमें 180 गृह निर्माण संस्थाओं की सूची और उनकी जमीनों के विस्तृत विवरण के साथ प्रशासन सहित नगर निगम, सहकारिता, नगर तथा ग्राम निवेश सहित सभी विभागों को सूचित किया गया कि इन संस्थाओं की जमीनों पर किसी भी तरह की अनुमति, डायवर्शन, नामांतरण या अन्य कोई भी कार्रवाई करने से पहले कलेक्टर से उसकी एनओसी ली जाए।
1 हजार एकड़ से अधिक इन बेशकीमती जमीनों की कीमत आज हजारों करोड़ रुपए होती है और इस आदेश में यह भी स्पष्ट कहा गया कि इन संस्थाओं ने शहरी सीलिंग एक्ट की धारा 20 की छूट प्राप्त कर सदस्यों की आवास समस्या का निराकरण करने की बजाय भूमाफियाओं ने इन जमीनों पर कब्जा कर उसका विशुद्ध व्यवसायिक लाभ हासिल करते हुए दुरुपयोग किया और विमुक्ति प्राप्त इन जमीनों को खुर्द-बुर्द कर दिया, जिसकी लगातार शिकायतें सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई से लेकर लगातार शासन-प्रशासन, पुलिस, सहकारिता को मिलती रही है। नतीजतन विमुक्त भूमि पर आवासीय योजनाएं तैयार कर आवासहीनों और निम्र आय वर्ग के सदस्यों को भूखंड उपलब्ध कराए जाएं, जिसके लिए तत्कालिन मुख्यमंत्री ने सुराज कॉलोनी की घोषणा भी की। जिस वक्त अभियान चल रहा था तब इस महत्वपूर्ण आदेश के साथ प्रशासन ने त्रिशला गृह निर्माण और सूर्या गृह निर्माण को सरकारी घोषित कर भी दिया था। हालांकि त्रिशला को हाईकोर्ट से स्टे मिला, जिस पर प्रशासन विस्तृत जवाब दे रहा है, तो दूसरी तरफ सूर्या गृह निर्माण को लेकर भी अभी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, उस पर भी प्रशासन विधिवत जवाब तैयार कर दे रहा है। वहीं कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि पूर्व में भी प्रशासन ने इन जमीनों सरकारी घोषित करने की प्रक्रिया के तहत प्रमुख सचिव राजस्व विभाग को पत्र भेजे, जिसमें पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह द्वारा 20.06.2024 का लिखा पत्र भी शामिल है। अब नए सिरे से इसी तरह की विस्तृत जानकारी के साथ शासन को पत्र भेजा जा रहा है, ताकि राजस्व विभाग से इन जमीनों को लेकर विधिवत आदेश जारी हो सकें।
इन प्रमुख संस्थाओं की जमीनें खुर्द-बुर्द कर दी गई
शहरी सीलिंग की छूट के दुरुपयोग के मामले में वैसे तो 180 गृह निर्माण संस्थाएं फंसी हुई हैं, मगर उनमें से कई चर्चित और दागी संस्थाएं हैं, जिनके खिलाफ ऑपरेशन भूमाफिया लगातार चलाए गए। इनमें देवी अहिल्या श्रमिक कामगार, मजदूर पंचायत, डाकतार, न्याय नगर, टेलीकॉम, विकास अपार्टमेंट, आदर्श श्रमिक गृह निर्माण, लक्ष्मण नगर गृह निर्माण, हरियाणा नगर गृह निर्माण, जागृति गृह निर्माण, नवभारत, माँ सरस्वती गृह निर्माण, बृजेश्वरी को-ऑपरेटिव, श्रीराम गृह निर्माण, शीतलेश्वर गृह निर्माण, जनकल्याण, आकाश गृह निर्माण, राजस्व कर्मचारी गृह निर्माण, कष्ट निवारण, उमंग गृह निर्माण, बसंत विहार गृह निर्माण, प्रगति गृह निर्माण, ग्रीन पार्क सोसायटी, जय हिन्द, त्रिशला गृह निर्माण, सूर्या गृह निर्माण, मारुति गृह निर्माण, सन्नी को-ऑपरेटिव, अप्सरा, संजना, मेघना गृह निर्माण, कल्पतरु, हीना पैलेस, सैटेलाइट सहित कई अन्य संस्थाओं के अलावा सीलिंग छूट प्राप्त जमीनें हैं, जिन्हें भूखंड पीडि़तों को आबंटित करने के बजाय भूमाफियाओं ने बेच डाला।
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