
इंदौर। स्वच्छता के क्षेत्र में नंबर-1 शहर इंदौर (Indore) का भागीरथपुरा (Bhagirathpura) इलाका इन दिनों एक बड़े मानवीय संकट से जूझ रहा है। पाइपलाइन में सीवेज का गंदा पानी मिलने के कारण फैले संक्रमण से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, कल रात अरविंदो हास्पिटल में भर्ती हेमंत गायकवाड़ (Hemant Gaikwad) नामक व्यक्ति की दूषित पानी पीने के बाद बिगड़ी तबीयत और संक्रमण के चलते मौत हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भागीरथपुरा निवासी हेमंत गायकवाड़ उर्फ बाला पिता गोविंद गायकवाड़ उम्र 51 वर्ष को दूषित पानी पीने के बाद 22 दिसंबर को परदेशीपुरा स्थिथ वर्मा नर्सिंग होम में भर्ती किया गया था। तभी से उनका उपचार चल रहा था। 7 जनवरी को हेमंत की तबीयत ज्यादा बिगड़ी इस पर उन्हें अरविंदो हास्पिटल में रेफर किया गया था, जहां कल रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
हेमंत परिवार का एकमात्र सहारा था, जो ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का लालन-पालन करता था। हेमंत के परिवार में चार बेटी रिया 21 वर्ष, खुशबू 16 वर्ष, मनाली 12 वर्ष एवं जिया 20 वर्ष है।
प्रमुख घटनाक्रम:
सीवेज का रिसाव: जांच में पाया गया कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने एक सावज़्जनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण पीने के पानी में सीवेज (मल-मूत्र वाला पानी) मिल गया था।
मौतों का आंकड़ा: इस इलाके में पिछले कुछ हफ्तों में दूषित जल के कारण होने वाली मौतों की संख्या 24 तक पहुंच गई है। हेमंत गायकवाड़ा की मौत ने प्रशासन की तैयारियों और दावों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीमारी का प्रकोप: क्षेत्र के हजारों लोग उल्टी, दस्त (डायरिया) और पेट के गंभीर संक्रमण की चपेट में हैं। कई मरीज अभी भी शहर के विभिन्न अस्पतालों और आईसीयू में भतीज़् हैं।
प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई
इस गंभीर लापरवाही पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर खंडपीठ) ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नगर निगम और प्रशासन से पूछा है कि पानी इतना जहरीला कैसे हो गया कि वह इंसानों के लिए जानलेवा बन गया?
मुआवजा: राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख की आथिज़्क सहायता देने की घोषणा की है।
इलाके में रोष और डर
भागीरथपुरा के स्थानीय निवासियों में भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि महीनों से गंदे पानी की शिकायत की जा रही थी, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। हेमंत गायकवाड़ा और अन्य पीड़ितों की मौतों ने पूरे क्षेत्र को दहशत में डाल दिया है।
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