
इंदौर। इंदौर में किन्नरों के बीच हुए विवाद के मामले में अब पुलिस विभाग के भीतर भी कार्रवाई देखने को मिली है। इस प्रकरण में लापरवाही बरतने के आरोप में पढ़रीनाथ थाना प्रभारी अजय राजोरिया को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लाइन अटैच कर दिया है। वहीं, जिन आरोपियों को जांच में कमजोर कार्रवाई के चलते जमानत मिल गई थी, उनकी जमानत निरस्त कराने को लेकर अब पुलिस कोर्ट में आवेदन लगाने की तैयारी कर रही है।
मामला इंदौर के पढ़रीनाथ थाना क्षेत्र का है, जहां कुछ समय पहले किन्नरों के दो गुटों के बीच विवाद सामने आया था। एक पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने किन्नर सपना हाजी सहित अन्य लोगों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाए गए थे कि पीड़ित पक्ष को डरा-धमकाकर पैसों की मांग की जा रही थी और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। प्रकरण दर्ज होने के बाद मामले की जांच पढ़रीनाथ थाना पुलिस द्वारा की जा रही थी। इसी दौरान आरोप लगे कि थाना प्रभारी द्वारा जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई। बताया जा रहा है कि पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद मजबूत केस डायरी तैयार नहीं की गई, जिसका फायदा आरोपियों को मिला और कई आरोपी आसानी से जमानत हासिल करने में सफल हो गए।
मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंची, जिसके बाद पूरे प्रकरण की समीक्षा की गई। जांच में प्रथम दृष्टया थाना प्रभारी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने पढ़रीनाथ थाना प्रभारी अजय राजोरिया को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। वहीं दूसरी ओर, पुलिस अब मामले को दोबारा मजबूती से कोर्ट में रखने की तैयारी कर रही है। जिन आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, उनकी जमानत निरस्त कराने के लिए पुलिस द्वारा जल्द ही न्यायालय में आवेदन लगाया जाएगा। इसके लिए केस से जुड़े साक्ष्यों को दोबारा संकलित किया जा रहा है और कानूनी राय भी ली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर भी आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
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