
जैन परिवार की युवती को किया रेस्क्यू, 12 साल पहले हुई थी शादी
इंदौर। 32 साल की जैन परिवार (Jain Family) की महिला (Woman) बीते कई समय से मानसिक रूप (Mentally) से विक्षिप्त होकर सडक़ों पर भीख (Begging) मांग रही थी। उक्त महिला एमएससी में गोल्ड मेडलिस्ट (Gold Medalist) रही और कई बड़ी संस्थाओं में फेकल्टी के रूप में काम भी किया। 12 साल पहले उक्त महिला की शादी श्योपुर के एक परिवार में हुई और उसके एक महीने बाद ही महिला अपने घर इंदौर लौट आई। उसके साथ क्या हुआ, यह आज तक रहस्य है। तब से ही उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई और घर वालों ने भी सारे प्रयास कर लिए। फिर थक-हारकर उसे उसके हाल पर छोड़ दिया। अभी संस्था प्रवेश ने उसका रेस्क्यू करवाया और बाणगंगा मानसिक चिकित्सालय में इलाज के लिए भर्ती करवाया। संस्था का कहना है कि उसका खोया सम्मान वापस दिलाना चाहते हैं।
यह महिला, जिसका नाम श्रद्धा है, हाथ में झाड़ू लिए सडक़ों पर भटकती है और कई लोगों ने उसे इस विक्षिप्त अवस्था में देखा भी है। संस्था प्रवेश की प्रमुख रुपाली जैन ने बताया कि उक्त महिला श्रद्धा न ा सिर्फ पढ़ी-लिखी, बल्कि सक्षम परिवार से ताल्लुक रखती है और कई महत्वपूर्ण संस्थाओं में उसने काम भी किया। अभी भी वह धाराप्रवाह अंग्रेजी में बात करती है। उसकी शादी 12 साल पहले श्योपुर में हुई थी। मगर एक माह बाद ही वह रोते हुए इंदौर स्थित अपने पीहर लौट आई। उसके साथ ससुराल में क्या हुआ यह अभी तक अनसुलझा रहस्य है। ससुराल वालों ने तो उसे तब ही ठुकरा दिया था और महिला के परिवार वालों ने उसे पहले अपनाया, मगर उसकी मानसिक अवस्था लगातार बिगड़ती गई, जिसके चलते पिता ने परिवार त्यागकर दीक्षा ले ली और बाद में समाधी मरण को प्राप्त हो गए। बूढ़ी माँ और दो सॉफ्टवेयर भाइयों ने श्रद्धा को संभालने के हरसंभव प्रयास किए। 70 साल की श्रद्धा की माँ ने जबलपुर मानसिक अस्पताल में भी इलाज कराया और अन्य प्रयास भी किए, मगर श्रद्धा की मानसिक स्थिति नहीं सुधरी। यहां तक कि उसके सगे बड़े भाई की भी शादी भी टूट गई और उसे दो बार थाने भी भिजवा दिया और वह माँ तथा भाई पर आए दिन हाथ भी उठाने लगी। कई दिनों तक नाहती नहीं, गंदे कपड़े पहनकर रहती और कुछ भी पूछने पर गंदी गालियां बकती, जिसके चलते माँ सहित भाइयों को भी उसे घर से निकालना पड़ा और सभी नाते तोड़ लिए। अब श्रद्धा की बात करने पर उसके घर वाले भी नाराज हो जाते हैं। संस्था प्रवेश की रुपाली जैन ने बताया कि अभी दो तीन दिन पहले श्रद्धा को उसके कार्यकर्ताओं को रेस्क्यू किया गया। वह बंगाली चौराहा, तिलक नगर जैन मंदिर के आसपास ही घूमती और रात को वहीं सो जाती। पत्थर और झाड़ू से आने-जाने वालों पर हमला भी करती। अब संस्था ने उसे बाणगंगा मानसिक चिकित्सालय में भर्ती कराया, ताकि उसका पुनर्वास हो सके।