
इन्दौर। किसानों (Farmers) को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से खाद (Fertilizer) उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने 1 अप्रैल से 100त्न ई-उर्वरक (ई-टोकन) प्रणाली लागू की थी, लेकिन जिले के कई निजी और सहकारिता विक्रेताओं (Cooperative Vendors) ने इस सिस्टम की धज्जियां उड़ाते हुए खाद वितरण में गंभीर गड़बड़ी कर दी।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ई-टोकन के बिना किसी भी किसान को खाद नहीं दी जाएगी, ताकि वितरण में पारदर्शिता बनी रहे और कालाबाजारी न हो, लेकिन इसके बावजूद कई विक्रेताओं ने ई-टोकन प्रणाली को दरकिनार कर सीधे पीओएस मशीन से खाद बांटना शुरू कर दिया, जिससे किसानों को लाइन में लगने, टोकन लेने और सही मात्रा में खाद पाने की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
2 अप्रैल को ही पकड़ी गई धांधली
जांच में सामने आया कि इन दो दिनों में निजी और सहकारी विक्रेताओं ने बिना ई-टोकन के सीधे पीओएस मशीन से उर्वरक वितरण किया। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए न केवल शासन के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना की, बल्कि किसानों के अधिकारों और पारदर्शिता के साथ सीधी छेड़छाड़ भी की गई है। गंभीर लापरवाही सामने आने पर प्रशासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए 4 निजी विक्रेताओं मेसर्स अभय सेल्स कार्पोरेशन डोंगरगांव महू, मेसर्स दुबे एग्रो एजेंसी सांवेर, मेसर्स जीआर इंटरप्राइजेस बेटमा, मेसर्स अभय सेल्स कार्पोरेशन ग्राम कलारिया (राऊ) के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इसके साथ ही 13 निजी विक्रेताओं और 2 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
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