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इंदौर: 2000 से अधिक परिवारों के लिए रेडक्रॉस बना सहारा

April 06, 2026

  • बीमारों की आर्थिक सहायता से लेकर महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाने तक—प्रशासन पूरे साल रहा मुस्तैद
  • 4 करोड़ से अधिक की मदद की …दानदाताओं सहित प्रशासन बना मसीहा, सही हकदार तक मदद पहुचाने लिए जांच पड़ताल कर रही टीम

इंदौर, प्रियंका जैन देशपाण्डे। लगातार बढ़ती महंगाई, आकस्मिक दुर्घटनाएँ, और कर्ज में डूबे गरीब ही नहीं, बल्कि उन मिडिल क्लास परिवारो के लिए इंदौर जिला प्रशासन मदद का हाथ बनकर खड़ा रहा है ।जो न किसी सरकारी योजना के दायरे में आते है, न जिन्हें आर्थिक सहायता का हकदार माना जाता है। महंगे इलाज, बढ़ते स्कूल खर्च और रोज़मर्रा की जरूरतों का बोझ उठाते–उठाते कई परिवार आर्थिक रूप से टूटने की कगार पर पहुँच गए थे ।अब 54 विधवा महिलाये सिलाई मशीन के माध्यम से न केवल अपने बचो के भविष्य को सवार पा रही है बल्कि 750 से अधिक मरीजो को इलाज मिल सका है।व कई छात्रों का जीवन सवार गया है।

कलेक्टर ने सरकारी योजनाओं से अलग हटकर, रेड क्रॉस , सामाजिक सरोकार,सीएसआर ओर दान दाताओं की मदद से हजारों परिवारो को जहा टूटने से बचा लिया बल्कि कई की जिंदगी बचाने की भी पहल की ओर सबसे कमजोर से लेकर ‘कागज़ों में सक्षम’ दिखने वाले लेकिन वास्तविकता में संघर्षरत मिडिल क्लास तक को मदद देकर हाथ थामा है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने अपने कार्यकाल में अब तक 2000 से अधिक परिवारों की मदद कर लगभग 4 करोड़ से अधिक की राशि उपलब्ध कराई है ।हालांकि सही हकदार तक मदद पहुंच सके इसके लिए एक जांच टीम तैयार की गई जो हितग्राही की पूरी जानकारी निकाल कर उसकी आर्थिक स्थिति की जांच कर रिपोर्ट तैयार करती और दस्तावेज (जरूरतमंद होने की पुष्टि ) सही पाए जाने पर ही मदद की गई। रेड क्रॉस सोसाइटी में नूडल अधिकारी की भूमिका निभा रहे संयुक्त कलेक्टर अजित श्रीवास्तव सहित एडीएम स्तर पर प्रकरणों को जांचा जा रहा है।


  • जनसुनवाई, ओर दुर्घटनाओ में सामने आए मरीज
    परिवार को खो देने के कारण परेशानिया झेल रहे जिले में कुल 638 आवेदकों को 1 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई। यह राशि उन जरूरतमंद नागरिकों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध हुई, जो कठिन परिस्थितियों में आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। इसके अतिरिक्त बीमार और गंभीर रोगों से पीडि़त मरीजों के लिए भी प्रशासन हर समय सक्रिय रहा। इलाज हेतु 750 मरीजों को ?2 करोड़ 41,14,811 की सहायता प्रदान की गई, जिससे उपचार का खर्च कम हुआ और परिवारों को राहत मिली। वही के मौत से जूझ रहे लोगो को ने जीवन दान मिला।

    304 छात्रों को नई राह
    शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाए। आर्थिक रूप से पिछड़े और कमज़ोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोडऩे के उद्देश्य से 304 विद्यार्थियों को 55लाख 56,301 की शिक्षा सहायता दी गई। यह राशि फीस, अध्ययन सामग्री और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए ढ़ी गई। वहीं अलग-अलग विशेष प्रकरणों के अंतर्गत 25 आवेदकों को कुल 10लाख की सहायता उपलब्ध कराई गई, जो उनकी दुर्घटना या आकस्मिक विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तत्काल राहत राशि के रूप में प्रदान की गई।

    54 विधवा प्रत्यक्ता का सहारा,लेपटोप भी
    महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण की दिशा में भी वर्ष भर प्रभावी कदम उठाए गए। स्वयं के पैरों पर खड़े होने और रोजगार अर्जित करने के उद्देश्य से 54 विधवा व परित्यक्त महिलाओं को सिलाई मशीनें प्रदान की गईं।इसके साथ ही 4 बच्चों को साइकिलें दी गईं ताकि वे बिना किसी बाधा के विद्यालय पहुँच सकें। उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले 16 आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को लैपटॉप उपलब्ध कराए गए, जिससे वे डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन संसाधनों से जुड़ सकें।

    कम कीमत में इलाज भी
    स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए शुरू किए गए रेडक्रॉस सोसायटी संस्था अपने दो प्रमुख चिकित्सीय केंद्र—चमेली देवी अग्रवाल ब्लड बैंक एवं डायग्नोस्टिक सेंटर, तथा सुश्रुत डायलीसिस एवं थैलेसीमिया सेंटर के माध्यम से कम दरों पर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करा रहा है । इन केंद्रों के कारण कई मरीजों को रक्त, पैथोलॉजी सेवाएँ और डायलीसिस बहुत ही काम दरों पर मिल रही है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र के जरिए लोगों को सस्ती कीमतों पर जीवनरक्षक दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे सामान्य परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ।

    वास्तविकता भी जांची
    आर्थिक सहायता देने के के बाद इन सभी परिवारों पर प्रशासन में पूरी नजर रखी और उन्हें दी गई मदद का सही उपयोग किया जा रहा है या नहीं इस पर भी नजर बनाए रखें समय-समय पर पटवारी महिला बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और अन्य अधिकारियों कर्मचारियों के माध्यम से होम विजिट भी कराई जा रही है वस्तु की स्थिति का जा जा ले देखा गया कि सिलाई मशीन पाकर कितनी महिलाओं ने रोजगार शुरू किया है। लैपटॉप मिलने के बाद 16 बच्चों के करियर में क्या बदलाव आया। इलाज के बाद 750 मरीजों की बाद की स्थिति कैसी है।

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