
6 साल के बच्चे सहित, 12 साल की बच्ची और घर के मुखिया की जान गई, मासूमों के शव निकाले तो रो पड़े लोग
इंदौर। रात के तीन-साढ़े तीन बजे के दरमियान बंगाली चौराहे (Bengali Square) के पास स्थित बृजेश्वरी एनेक्स (Brijeshwari Annex) के एक घर में लगे इलेक्ट्रिक कार चार्जर (Electric Car Charger) के फटने से लगी आग ने समीप रखे गैस सिलेंडरों (Gas cylinders) को आग के दावानल में बदल दिया और पूरा इलाका धमाकों की आवाज से गूंज उठा। एक के बाद एक चार सिलेंडरों में लगी आग से न केवल मकान का एक हिस्सा ढह गया, बल्कि अंदर सो रहे लोगों को भी संभलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते पुगलिया परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई और 4 गंभीर रूप से जुलस गए। मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल है। जिस घर में आग लगी उस घर के रिश्तेदार राठी परिवार के लोग भी ठहरे हुए थे, जिनमें से कई लोग इस हादसे का शिकार हो गए। धमाके और आग लगने के बाद इन लोगों ने घर से निकलने की कोशिश भी की, लेकिन इलेक्ट्रानिक दरवाजा होने के कारण घर का द्वार नहीं खुल सका और कोई भी जिंदा बाहर नहीं निकल सका। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग एकत्रित हुए और फायर ब्रिगेड तथा पुलिस को सूचना दी। पड़ोस के मकान की छत के रास्ते रेस्क्यू टीमें घर में घुसीं और एक-एक कर लोगों को निकाला और एंबुलेंस की मदद से एमवाय अस्पताल पहुंचाया।
पुलिस कमिश्नर संतोषकुमार सिंह ने बताया कि घटना की सूचना सुबह साढ़े तीन से चार बजे के बीच मिली। वे खुद और आसपास के थानों की टीमें और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू किया। घटना तिलकनगर थाना क्षेत्र में 87 अर्हम विला में रहने वाले उद्योगपति मनोज पुगलिया के मकान में हुई। पुगलिया की सियागंज में दुकान और पीथमपुर में प्लास्टिक की फैक्ट्री है। ये दस साल से यहीं रह रहे हैं। आग का कारण घर के बाहर खड़ी उनकी ईवी कार बताई गई है, जिसमें पहले आग लगी और फिर घर के अंदर रखी गैस टंंकियों में धमाके हुए। इसके बाद लोग बाहर आए।

बेटों को बाहर निकाला लेकिन खुद और बहू अंदर ही रह गए
प्रत्यक्षदर्शियों कपिल लाहोटी और राहुल ने बताया कि मनोज ने आग लगने के बाद अपने तीनों बेटों को घर से बाहर निकाल दिया था, लेकिन वे खुद आग से बाहर नहीं निकल सके और उनकी एक बहू की भी मौत हो गई।

एक बहू मायके गई थी इसलिए बच गई
मनोज के मंझले बेटे का विवाह चार माह पहले पेटलावद में हुआ था। उनकी मंझली बहू फिलहाल मायके गई हुई थी, इसलिए बच गई, लेकिन पारिवारिक आयोजन होने से आए अन्य रिश्तेदार चपेट में आ गए।

एक घंटे बाद फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची
लोगों का कहना है कि घटना के बाद तुरंत लोगों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम एक घंटे बाद आई। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि दो बार तो पानी खत्म होने से काम रुक गया। रेस्क्यू टीमों ने पास के मकान की छत से घर में प्रवेश किया और फिर एक-एक को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। आग बुझाने का काम सुबह तक जारी था।

मृतकों में मेहमान भी शामिल
आग की चपेट में आने से मनोज पुगलिया 65 साल, उनकी बड़ी बहू सिमरन 30 साल, वहीं उनके ससुराल पक्ष से आए मेहमानों में से साला विजय सेठिया 65 साल, उनका बेटा छोटू 22 साल, 60 साल की सुमन, 12 साल की राशि, तन्मय 6 साल, टीना 35 साल की मौत हो गई, जबकि घायलों में मनोज के बड़े बेटे सौरभ और तीसरा बेटा हर्षित शामिल हैं। हालांकि ये लोग मामूली झुलसे हैं। बताते हैं कि बिहार के किशनगंज के रहने वाले मनोज के साले विजय को कैंसर था, जिसका उपचार करवाने वे परिवार सहित इंदौर आए थे।

आग लगने से बिजली चली गई, नहीं खुले घर के इलेक्ट्रानिक गेट
पहले तो गहरी नींद में सोए लोगों की नींद आग फैलने के बावजूद नहीं खुली, लेकिन जब गैस सिलेडरों में विस्फोट हुआ तो घबराए लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन आग की वजह से लाइट चली गई थी और घर के इलेक्ट्रानिक गेट नहीं खुल सके। इस कारण घर के सभी लोग आग के दावानल में फंस गए और एक के बाद एक उनकी मौत होती चली गई।

मंत्री ने जांच कमेटी बनाने के दिए निर्देश
घटना की सूचना मिलने पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसीराम सिलावट, विधायक महेंद्र हार्डिया, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, पुलिस कमिश्नर संतोषकुमारसिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। विजयवर्गीय ने अधिकारी को निर्देश दिए कि कार चार्जर के खतरे के आकलन के लिए एक कमेटी बनाई जाए और सुरक्षा निर्देश जारी किए जाएं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved