
इंदौर। नगर निगम में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले एक रिटायर कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिजनों ने कल लाश लेकर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। करीब आधा घंटे तक निगम अधिकारियों का इंतजार करते रहे। नहीं आए तो मजबूरन अर्थी उठाना पड़ी। नगर निगम में 1989 में सीधी भर्ती के माध्यम से 110 लोगों को सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्ति मिली थी। उनमें उषा फाटक इंदौर निवासी महेंद्र पिता जगदीश पथरोड़ भी शामिल था।
महेंद्र 30 दिसंबर 2024 को रिटायर हो गया था, लेकिन 1 साल बाद भी नगर निगम की ओर से उसको ग्रेच्युटी की राशि नहीं मिली थी और पेंशन भी शुरू नहीं हुई थी, जिसको लेकर रिटायर्ड कर्मचारी महेंद्र पिछले 6 माह से अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहा था एवं डिप्रेशन में भी आ गया था। 5 दिनों से उसकी तबीयत बिगडऩे लगी थी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे महेंद्र की कल उपचार के दौरान मौत हो गई थी। परिवार में इसके दो बच्चे (एक लडक़ा और एक लडक़ी) हैं।
कर्मचारी नेता नागेश गौहर, लीलाधर करोसिया, संतोष कल्याणे ने बताया कि अभी भी निगम के 25 सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जो रिटायरमेंट के बाद पेंशन राशि और अन्य राशि नहीं मिलने के अभाव में भटक रहे हैं। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं कि धारा 64 के अंतर्गत किसी भी कर्मचारी का पैसा रोकने का अधिकार सरकार को नहीं है। चूंकि संबंधित कर्मचारी का मामला न्यायालय में लंबित है, ऐसी स्थिति में उसका पैसा रोकना नियमों का उल्लंघन है। ज्ञात रहे कि तत्कालीन निगम आयुक्त शिवम वर्मा ने निगम के 11 कर्मचारियों की पेंशन शुरू करवाई थी, जो लंबे समय से बंद पड़ी थी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved