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इंदौर: ज्यादा चंदा उगाने वाली पार्टी मंडल प्रशिक्षण में कर रही कंजूसी

March 18, 2026

वक्ताओं की कमी या फिर जानबूझकर खर्च बचाने के लिए एक ही जगह हो रहे दो मंडलों के प्रशिक्षण के आयोजन

इंदौर। पूरे देश में सर्वाधिक चंदा (Highest Donation) उगाने वाली और सर्वाधिक धनवान पार्टी (Wealthy Party) के रूप में भाजपा (BJP) को जाना जाता है, लेकिन इस बार पार्टी अपने मंडलों के प्रशिक्षण में सोच-समझकर खर्च कर रही है। एक ही स्थान पर दो-दो मंडलों के प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जा रहे हैं। अब इसे कंजूसी कहा जाए या मितव्ययिता?



  • भाजपा में प्रशिक्षण को अहम माना गया है और समय-समय पर भाजपा ऐसे प्रशिद्वाण वर्ग का आयोजन करती रहती है, जिसमें पदाधिकारयों और कार्यकर्ताओं को कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। इंदौर में हुए संभाग स्तरीय स्मेलन के बाद अब मंडल स्तर पर भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग शुरू हुए हैं। ये वर्ग उसी क्षेत्र में किए जाना थे, लेकिन सुविधा की दृष्टि से मंडल अध्यक्षों और विधायको ने मिलकर ये वर्ग एक ही स्थान पर रख लिए, ताकि कार्यकर्ताओं की संख्या ज्यादा से ज्यादा नजर आए। कल तीन नंबर विधानसभा और पांच नंबर विधानसभा का वर्ग शुरू हुआ। तीन नंबर विधानसभा के दो मंडलों का वर्ग पॉम ट्री होटल तो दो मंडलों का वर्ग मधुर वाटिका में रखा गया था जो आज समाप्त हो जाएगा। दोनों के एक जैसे सत्र रखे गए, जिसमें वक्ताओं में नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक गोलू शुक्ला और अन्य लोग भी पहुंचे। शाम को गीत-संगीत की महफिल भी दोनों मंडलों को मिलाकर रखी गई थी। वहीं पांच नंबर विधानसभा के सभी 6 मंडलों का वर्ग बायपास पर अग्रसेन भवन में रख लिया गया। कल से यह प्रशिक्षण भी शुरु हो गया है। दोनों ही विधानसभाओं की तरह दूसरी अन्य विधानसभा के मंडल अध्यक्ष भी अब इसी तरह खर्च में कंजूसी कर एक ही स्थान पर रखने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि संगठन से आदेश थे कि सभी मंडलों के वर्ग अलग-अलग रखे जाएं। यही नहीं कल से शुरू हुए दोनों विधानसभाओं के वर्ग में से अधिकांश नेता रात को नदारद हो गए और अपने-अपने घर पहुंच गए। इन पर मंडल अध्यक्षों ने सख्ती भी नहीं की और उन्हें जाने दिया। आज सुबह फिर ये नेता वर्ग में पहुंच गए हैं। आजीवन सहयोग निधि के नाम पर चंदा उगाने वाली पार्टी के मंडलों के पास प्रशिक्षण वर्ग के लिए ही राशि नहीं है, इसलिए कई मंडलों ने आपस में खर्चे बांटकर वर्ग की औपचारिकता पूरी कर ली। सवाल उठता है कि क्या संगठन के दिशा निर्देश के अनुसार ये काम हुआ या फिर स्थानीय नेताओं ने अपनी सहूलियत के हिसाब से पार्टी के इतने महत्पपूर्ण अभियान की इतिश्री कर दी।

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