
इंदौर। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के चलते मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की होटलों में कोयले की भ_ी पर खाना बन रहा है। वहीं कहीं ताबड़तोड़ इंडक्शन खरीदे गए हैं। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के पास भी तीन से चार दिन का ही स्टॉक बचा है और विभाग की प्रदेश की कई ऐसी होटलें हैं, जो सालभर पर्यटकों से गुलजार रहती हैं। ऐसे में विभाग के मुख्यालय से कल सभी रीजन के क्षेत्रीय प्रबंधकों के लिए सर्कुलर जारी किया गया है और बची कमर्शियल गैस को सावधानी से इस्तेमाल कर उसके विकल्प पर काम करने की बात कही गई है। हालांकि विभाग की कई बड़ी होटलों में गैस बैंक है, लेकिन वो भी जल्द ही खत्म हो जाएगी। ऐसे में जिन होटल में लगातार पर्यटकों की बुकिंग है, उनके इंतजाम में परेशानी आ सकती है, जिसके चलते होटलों में विकल्प के तौर पर कोयले की भ_ी, तंदूर और लकड़ी के पारंपरिक चूल्हे पर भी काम करने का विकल्प दिया है। छोटे-मोटे पकवानों के लिए अपने स्तर पर ही इंडक्शन (इलेक्ट्रिक चूल्हे) खरीदने के विकल्प भी दे दिए गए हैं। प्रदेश के सभी रीजन के कुछ स्थान और होटल ऐसे हैं, जहां आने वाले समय के लिए बुकिंग ज्यादा है। इनमें उज्जैन, मांडू, पचमढ़ी और नेशनल उद्यानों वाले क्षेत्र शामिल हैं।
67 से ज्यादा होटल और 1400 से ज्यादा कमरे
उल्लेखनीय है कि विभाग के पूरे प्रदेश में 67 से ज्यादा होटल में 1400 से ज्यादा कमरे हैं। विभाग ने पूरे प्रदेश को 6 रीजन में बांटा हुआ है, जिनमें कुछ शहर तो ऐसे हैं, जहां विभाग तीन से ज्यादा होटल संचालित करता है। इनमें उज्जैन, पचमढ़ी जैसे स्थान शामिल हैं।
मांडू जैसे कई अन्य स्थानों पर पारंपरिक रसोई
जीएम ऑपरेशंस और आरएम इंदौर रीजन अजय श्रीवास्तव ने बताया कि मांडू और कई अन्य स्थानों पर विभाग पर्यटकों को देसी अनुभव देने के लिए चूल्हे का विकल्प भी रखता है। ये होटल परिसर में ही अलग सेटअप में हैं। वो भी इस समय काम आ रहे हैं। इसके अलावा सर्कुलर जारी कर स्टॉक को समझदारी से इस्तेमाल करने की बात भी सभी आरएम और होटल मैनेजर से कह दी गई है। उम्मीद है जल्दी ही सरकार इसका कोई रास्ता निकाल लेगी। अगर एक या दो कमर्शियल सिलेंडर भी सप्लाय होते हैं तो सब आसानी से संचालित हो जाएगा। कई स्थानों पर कल कोयला भ_ी पर खाना बनाया गया, जिसे मेहमानों ने पसंद भी किया।
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