
स्टार्म वाटर लाइन डालने में पैदा हुई बाधा, निवारण में लगेंगे 15 दिन
इंदौर। छावनी (Chhawani) की सड़क (Road) के काम में पानी की लाइन (Water pipeline) के कारण बाधा पैदा हो गई है। स्टार्म वाटर लाइन (Stormwater line) डालने के लिए की जाने की खुदाई में पानी की लाइन आ गई है। अब इस लाइन की शिफ्टिंग की जाएगी जिसके कारण काम 15 दिन से ज्यादा विलंब का शिकार होगा।
नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान की 23 सड़कों का निर्माण पूरे शहर के अलग-अलग क्षेत्र में करने का काम हाथ में लिया गया है। इसके तहत निगम की ओर से मधुमिलन चौराहा से जगन्नाथ धर्मशाला तक छावनी की सड़क का निर्माण और उसे चौड़ा करने का काम भी किया जा रहा है। यह काम तेज गति के साथ चल रहा है और इस काम को जल्दी से जल्दी समेटने की तैयारी निगम कर रहा है। इस तैयारी को कल एक बार फिर झटका लग गया। कल जब नगर निगम के अधिकारी सड़क के निर्माण की स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे और उन्होंने ठेकेदार फर्म के प्रतिनिधि से चर्चा की तो उन्हें नए हालात का पता चला। ठेकेदार द्वारा निगम के अधिकारियों को बताया गया कि मधुमिलन चौराहे से छावनी की तरफ जाने वाले मार्ग पर लेफ्ट साइड पर स्टार्म वाटर लाइन डालने के लिए काम शुरू किया गया। इसके लिए खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान छावनी स्कूल के बाहर की तरफ खुदाई में पानी की लाइन निकली है। अब इस पानी की लाइन को शिफ्ट करना पड़ेगा उसके बाद ही स्टार्म वाटर लाइन डालने का काम हो सकेगा। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर को जैसे ही यह जानकारी मिली वैसे ही उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों को बुलाकर उनसे इस संबंध में चर्चा की। इन अधिकारियों ने बताया कि इस मार्ग पर पानी और ड्रेनेज की लाइन के कोई मैप मौजूद नहीं थे। ऐसे में यह समझ पाना मुश्किल था कि कहां से कौन सी लाइन जा रही है। यही कारण है कि स्टार्म वाटर लाइन डालने के स्थान पर नीचे पानी की लाइन निकल गई है। इस पानी की लाइन को शिफ्ट करने का काम किया जाएगा । इस काम में कम से कम 15 दिन का समय लगेगा और नगर निगम को मोटे तौर पर 12 लाख रुपए खर्च करना पड़ेंगे। इसके साथ ही अधिकारियों द्वारा दौरे के दौरान ठेकेदार फर्म को निर्देश दिया गया कि इस नवनिर्मित की जा रही सड़क को छावनी के चौराहे की सड़क से जोड़ने का काम किया जाए, ताकि इस सड़क का जो मेन कैरेज वे बनकर तैयार हो गया है, उसका नागरिक पूर्ण सुविधा के साथ उपयोग कर सकें।
350 टैंकर भी कम पड़ने लगे इतने ही टैंकर और मांगे
नगर निगम द्वारा इन दिनों शहर में पानी बांटने के लिए खुद के और किराए के करीब 350 टैंकर दौड़ाए जा रहे हैं, मगर उसके बावजूद कई क्षेत्रों में पानी नहीं मिलने की शिकायतों के साथ पार्षदों द्वारा टैंकर मांगे जा रहे हैं। इसी के चलते अब निगम किराए के फिर से इतने ही टैंकर और अटैच करने की तैयारी में है, ताकि कई दूरस्थ कालोनियों में पानी बांटने के लिए टैंकर भेजे जा सकें।
मई-जून के दौरान नगर निगम ने करीब 600 से ज्यादा टैंकर किराए पर लेकर पानी बांटने का काम शुरू कराया था। उसके साथ ही सांसद निधि और विधायक निधि से मिले ट्रैक्टर टैंकर और अन्य टैंकरों को भी पानी बांटने के कार्यों में झोंका गया था। निगम के पास खुद के करीब 85 से ज्यादा छोटे-बड़े टैंकर हैं, जो लगातार पानी बांटने के कार्यों में उपयोग किए जाते हैं। शहर के कई बड़े वार्डों में पानी की दिक्कतें बढ़ने के चलते क्षेत्रीय पार्षदों द्वारा टैंकर दिए जाने की मांग की जा रही है। इसके लिए वे लगातार आला अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर निगम द्वारा पानी बांटने के लिए अभी भी किराए के कई टैंकर दौड़ाए जा रहे हैं, जो कम पड़ रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक हवा बंगला, सुखलिया, बिलावली, कृषि विहार, स्टेडियम, किला मैदान और पल्हर नगर झोन सहित कई अन्य झोनलों के अंतर्गत आने वाले वार्डों में पानी की दिक्कतें ज्यादा हैं। इनमें से कई कालोनियों में नर्मदा की सप्लाय लाइनें नहीं होने के चलते दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि कई जगह बोरिंगों से भी पानी आना कम हो गया है। पार्षदों की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए निगम द्वारा फिलहाल स्थिति से निपटने के लिए 350 टैंकर और किराए पर लेने की तैयारी है और उसको लेकर आला अधिकारियों से बातचीत चल रही है। नगर निगम द्वारा खुद के 100 टैंकर खरीदे जाने हैं, जिसका प्रस्ताव तैयार कर एआईसी को भेजा गया है, लेकिन प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से लेकर खरीदी की प्रक्रिया में विलम्ब के चलते फिलहाल किराए के टैंकर अटैच किए जाने की तैयारी है।
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