
इंदौर। एक तरफ महापौर ने अपने बजट में कोई नया कर नहीं लगाने का दावा किया, तो दूसरी तरफ हर साल रेट झोन बदलने, एमओएस पर भी सम्पत्ति कर ठोंकने सहित कई निर्णय पर्दे के पीछे ले लिए जाते हैं। इसी कड़ी में सीवर लाइन और एसटीपी निर्माण के लिए भी प्रति व्यक्ति 5050 रुपए की वसूली का प्रावधान किया गया है। निर्माण पे-एण्ड-यूज पद्धति पर कराया जायेगा। स्लम बस्तियों में गरीब तबके के लोग शौचालय के युज उपंरात न्युनतम राशि देने की स्थिति में नहीं होने से 113 स्थानों के सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालयों एवं 40 स्थानों पर आदर्श युरिनल को जनता के उपयोग हेतु नि:शुल्क किया गया है, जिससे वह खुले में शौच ना करें तथा शौचालयों का संचालन एवं संधारण व्यवस्था के लिये स्वंयसेवी संगठन/संस्था को प्रति शौचालय प्रतिमाह साफ-सफाई व्यवस्था एवं केयर टेकर को राशि रु 15,000/- शौचालय एवं 41,000/- प्रति युरिनल के मान से भुगतान किये जाने हेतु वित्तिय वर्ष 2026-27 में राशि रू. 10.00 करोड़ का बजट में प्रावधान किया गया है। शहर में स्थित विभिन्न तालाब सिरपुर, खजराना, बिलावली, लिम्बोदी, तलावली चांदा, भौंरासला, पिपलियाहाना एवं लसुडिया मोरी तालाबों के रखरखाव एवं जीर्णोद्वार हेतु वित्तिय वर्ष 2026-27 में विभिन्न बजट मदों में कुल राशि रू. 30.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
शहर में स्थित विभिन्न कुंओ व बावडिय़ों के जीर्णोद्वार एवं साफ-सफाई व रखरखाव हेतु वित्तिय वर्ष 2026-27 में विभिन्न बजट मदों में कुल राशि रू. 20.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सिहंस्थ-2028 के दृष्टिगत कान्ह नदी शुद्धिकरण हेतु पालदा एवं कुमेठी क्षेत्र में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना है, साथ ही सांवेर रोड़ स्थित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता वृद्धि हेतु प्लांट का अपग्रेडेशन कार्य किया जाना है। शहर के विभिन्न नालों एवं कान्ह व सरस्वती नदी पर आवश्यकतानुसार विकेन्द्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना है, उक्त कार्य की डी.पी.आर. तैयार की जा रही है। प्रांरभिक रूप से किये गये सर्वे के अनुसार उक्त कार्यों में राशि रू. 625 करोड़ का व्यय होना संभावित है। निगम द्वारा 100 कि.मी. नवीन सीवरेज लाईन डालने का लक्ष्य रखा गया है।
25 हजार घरों को दिए पते, तो 30 लाख दस्तावेज भी हुए डिजिटल
अपने डिजिटल बजट में महापौर ने यह भी दावा किया कि इंदौर प्रदेश का पहला निगम है, जो डिजिटल भारत के सपनों को साकार करने जा रहा है। निगम का खुद का पोर्टल भी तैयार है, जिसका लाभ जल्द मिलेगा। डिजिटल पते के रूप में 25 हजार घरों को पहचान दी गई और निगम के 30 लाख दस्तावेजों का भी डिजिटलाइजेशन हो चुका है। कचरा प्रबंधन में भी इंदौर ने कई उदाहरण प्रस्तुत किए। गीले-सूखे कचरे के प्रबंधन के बाद बेकार कपड़े, फाइबर, यूज्ड ऑइल को भी रीयूजेबल बनाया जा रहा है, तो आरडीएफ से चारकोल बनाकर हरित ईधन का निर्माण किया गया। ऑन डिमांड कूड़ा कलेक्शन भी डिजिटाइज्ड हो रहा है, तो देवगुराडिय़ा के बायो सीएनजी प्लांट की क्षमता 550 टन से बढक़र अब 800 टन प्रतिदिन हो गई है। पहला 100 टन का ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट भी शुरू हो गया, जिससे पैलेट बनाकर बायो फ्यूल तैयार हो रहा है।
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