
इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित जल का सप्लाय किए जाने से 24 लोगों की मौत होने की घटना स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर के रुतबे को प्रभावित नहीं कर पाएगी। इस सर्वेक्षण में केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छ पेयजल सप्लाय करने का कोई मुद्दा ही नहीं रखा गया है।
जबसे भागीरथपुरा का हादसा हुआ है, तब से लगातार यह कहा जा रहा है कि इस घटना के बाद अब स्वच्छता सर्वेक्षण में सिरमौर होने का इंदौर का दावा बिगड़ जाएगा। इस बार इंदौर रैंकिंग में पिछड जाएगा। इंदौर के हाथ से स्वच्छता का ताज चला जाएगा। अखबारों में लिखे जा रहे और कांग्रेस के नेताओं द्वारा किए जा रहे इस दावे के बीच पिछले दिनों प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि इंदौर स्वच्छता में नंबर एक था, इंदौर स्वच्छता में नंबर एक है और इंदौर स्वच्छता में नंबर एक रहेगा। इसी तरह का दावा महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी किया था। इस दावे के बीच में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि आखिर कैसे इंदौर सिरमौर बना रहेगा।
पिछले महीने केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2025 के स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए टूल किट जारी की गई। इस टूल किट में यह जानकारी दी गई है कि इस बार का सर्वेक्षण 12,500 अंक का होगा। इसमें किसी कार्य के लिए कितने अंक दिए जाएंगे, यह भी स्पष्ट किया गया है। इस सर्वेक्षण में केंद्र सरकार द्वारा शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने, पेयजल की लाइन में लीकेज नहीं होने जैसे कामों को सर्वेक्षण का आधार नहीं बनाया जाता है। इस बार के सर्वेक्षण के लिए भी जारी की गई टूल किट में इस मुद्दे को शामिल नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट है कि भागीरथपुरा की घटना से इंदौर की सफलता की संभावना पर कहीं कोई ग्रहण नहीं लग पाएगा।
वाटर प्लस का तमगा जुलाई तक है प्रभावी
स्वच्छता के इस सर्वेक्षण में वाटर प्लस सिटी का तमगा होने के कारण संबंधित शहर को 1000 अंक प्राप्त होते हैं। इंदौर को इस बार के सर्वेक्षण में भी इस श्रेणी के पूरे 1000 अंक मिलेंगे। इंदौर के पास जो वाटर प्लस सिटी होने का गौरव है, वह अभी कायम है। इस सर्वेक्षण से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि जुलाई 2026 तक इंदौर का यह स्टेटस कायम रहेगा। इसके बाद भारत सरकार की टीम द्वारा एक बार फिर वाटर प्लस सिटी के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा। वाटर प्लस सिटी का सर्वेक्षण होने के बाद में जो तमगा दिया जाता है, वह 1 वर्ष के लिए प्रभावी होता है। स्वच्छता का पिछले साल का सर्वेक्षण इस साल मार्च के माह से शुरू होने की उम्मीद है। तो ऐसे में इस सर्वेक्षण के साथ में अथवा उसके पहले वाटर प्लस का सर्वेक्षण नहीं होगा। ऐसे में इंदौर के 1000 अंक पर कहीं कोई समस्या नहीं है।
वाटर प्लस का नहीं है पेयजल से कोई सरोकार
वैसे तो भारत सरकार द्वारा सर्वेक्षण के बाद वाटर प्लस सिटी होने की श्रेणी दी जाती है, लेकिन इस श्रेणी का और इस सर्वेक्षण का पेयजल से कोई संबंध नहीं है। इस सर्वेक्षण के कार्य को देखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि यह सर्वेक्षण पूरी तरह से ड्रेनेज के पानी को साफ पानी के रूप में परिवर्तित करने और उसका पुनरुपयोग करने पर आधारित रहता है। यही कारण है कि जब प्रतिभा पाल इंदौर नगर निगम की आयुक्त थीं, तब उनके द्वारा नाले में जाकर मिलने वाले ड्रेनेज लाइन के आउटफॉल्स को बंद करवा कर देने इसकी लाइन में जोड़ दिया गया था। इस काम के आधार पर ही पहली बार इंदौर ने वाटर प्लस सिटी होने का गौरव हासिल किया था। इस सर्वेक्षण में कहीं भी ड्रेनेज की लाइन के पानी की लाइन में मिक्स हो जाने अथवा दूषित जल का सप्लाय होने जैसी चीजों को सर्वेक्षण का आधार नहीं बनाया गया है।
स्टार रैंकिंग के भी मिलेंगे पूरे अंक
इस बार के स्वच्छता सर्वेक्षण में भी इंदौर को पिछली बार हासिल की गई सेवन स्टार सिटी की रैंकिंग के पूरे 1000 अंक प्राप्त होंगे। स्टार रैंकिंग भी 1 साल के लिए ही होती है। इंदौर की यह रैंकिंग भी जुलाई 2026 तक कायम है। ऐसे में अभी जो सर्वेक्षण होना है, उसमें इस श्रेणी के अंक नगर निगम को पूरे प्राप्त हो जाएंगे। इस तरह की स्थिति से यह स्पष्ट है कि भागीरथपुरा की घटना से इंदौर के देश के सबसे स्वच्छ शहर होने के गौरव पर कहीं कोई असर नहीं पड़ता है।
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