
नई दिल्ली। नोएडा (In Noida)में पुलिस(police) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड(major international cyber fraud module) मॉड्यूल का पर्दाफाश(thereby foiling) करते हुए करोड़ों रुपये की ठगी की साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया(Investigations revealed)। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों(exploit vulnerabilities) का फायदा उठाकर करीब 60 से 80 करोड़ रुपये अलग-अलग म्यूल अकाउंट्स(mule accounts) में ट्रांसफर करने की तैयारी में था। गौतमबुद्धनगर (Gautam Buddh Nagar)पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने कार्रवाई करते हुए दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार(Police arrested) किया है। प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क(network has links) के तार नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका (Nigeria and South Africa.)तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, सूचना मिली थी कि एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड मॉड्यूल भारत में सक्रिय है और बड़े स्तर पर बैंकिंग सिस्टम को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है। सूचना मिलते ही साइबर क्राइम थाना, नॉलेज पार्क थाना और मेरठ जोन की साइबर कमांडो टीम को अलर्ट कर दिया गया। इसके बाद कई दिनों तक तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और संदिग्ध लेनदेन की जांच की गई।
डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी अंतरराष्ट्रीय साइबर थ्रेट ग्रुप “Solar Spider” से जुड़े हुए हैं। यह ग्रुप अलग-अलग देशों में साइबर हमलों और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पहले भी सक्रिय रहा है। जांच में सामने आया कि गिरोह खासतौर पर कुछ को-ऑपरेटिव बैंकों की साइबर सुरक्षा में मौजूद खामियों को निशाना बना रहा था।
आरोपियों की रणनीति बेहद सुनियोजित थी। वे अपने ट्रांजेक्शन जानबूझकर वीकेंड के दौरान करते थे, क्योंकि उस समय कई बैंक बंद रहते हैं या उनकी निगरानी सीमित होती है। इसी रणनीति के तहत 7 से 8 मार्च के बीच आरोपियों ने गुजरात के एक को-ऑपरेटिव बैंक को निशाना बनाते हुए करीब 7 करोड़ रुपये की ठगी कर ली थी।
जांच में यह भी पता चला कि गिरोह का असली प्लान इससे कहीं बड़ा था। वे बैंक खातों से 60 से 80 करोड़ रुपये तक की रकम अलग-अलग म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर करने की तैयारी में थे। म्यूल अकाउंट्स ऐसे खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल सिर्फ पैसे को कई लेयर में घुमाने के लिए किया जाता है, ताकि असली स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, म्यूल अकाउंट्स में पैसा भेजने के बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी वॉलेट्स में ट्रांसफर करने की योजना थी। इस प्रक्रिया के बाद पैसों का ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका में सक्रिय साइबर अपराधियों से जुड़े हो सकते हैं।
जैसे ही पुलिस को इस बड़े फ्रॉड प्लान की जानकारी मिली, तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई। साइबर क्राइम टीम ने संदिग्ध आईपी एड्रेस, डिजिटल ट्रांजेक्शन और बैंक खातों की निगरानी शुरू की। साथ ही इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर और संबंधित बैंकों को भी अलर्ट किया गया, जिससे ठगी की बड़ी वारदात को समय रहते रोका जा सका।
लगातार निगरानी और तकनीकी जांच के बाद पुलिस को मॉड्यूल के कुछ सदस्यों की लोकेशन का पता चला। इसके बाद नोएडा में ऑपरेशन चलाकर दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के पास से कई डिजिटल डिवाइस और अहम इलेक्ट्रॉनिक सबूत बरामद किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है।
पुलिस का मानना है कि इन डिवाइसों से पूरे अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस मॉड्यूल में और कितने लोग शामिल हैं और किन-किन देशों तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है।
इस मामले के सामने आने के बाद गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने सभी को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। बैंकों को अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत करने, सिस्टम ऑडिट कराने और सुरक्षा खामियों की तुरंत समीक्षा करने की सलाह दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस नेटवर्क के कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved