
मॉस्को। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब रूस का भी बयान सामने आया है। बढ़ते संघर्ष और हमलों पर मॉस्को ने चिंता जताते हुए कहा कि इस संघर्ष के बाद ऐसा लग रहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून अब वास्तव में मौजूद नहीं है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने क्षेत्र की बढ़ती अस्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर इसके गंभीर प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। पेस्कोव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून कानूनी तौर पर तो मौजूद है , लेकिन वास्तविकता में यह काम नहीं कर रहा। यह पूरी तरह से खतरे में है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने आगे कहा कि हम किसी से नहीं कह सकते कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें, किस कानून का पालन करें? आज कोई भी इसे स्पष्ट रूप से नहीं बता सकता। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया की स्थिति काफी अस्थिर हो गई है और क्षेत्रीय संघर्षों और अनसुलझे मुद्दों का असर अब राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर दिख रहा है।
इसके साथ ही अपने बयान में पेस्कोव ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव को दोहराने की जरूरत बताई, जिसमें उन्होंने COVID-19 से पहले पी-5 देशों रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के शिखर सम्मेलन की मांग की थी ताकि वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा की जा सके।
दूसरी ओर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका को अपने व्यापक योजनाओं की स्पष्टता देनी चाहिए और बताना चाहिए कि ये योजनाएं पहले से मौजूद अंतरराष्ट्रीय नियमों से कैसे जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि हम यह जानना चाहते हैं कि हम किस दुनिया में रह रहे हैं और अमेरिका की योजनाएं इससे कैसे मेल खाती हैं।
गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के ताबड़तोड़ हमले और फिर जवाब में ईरान का इस्राइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जोरदार बमबारी के बीच रूस की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय कानून की मौजूदा स्थिति को लेकर दुनिया की नजरें अब P-5 देशों पर टिक गई हैं।
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