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राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच तेज, सीसीटीवी फुटेज से मिले अहम सुराग; ट्रस्ट व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश संभव

June 21, 2026

अयोध्या। राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज (CCTV footage) में कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं, जिन्हें मामले की पड़ताल में अहम माना जा रहा है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में मंदिर प्रबंधन व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर भी कई सवाल उठे हैं।

सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान कुछ फुटेज में संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां दर्ज मिली हैं। साथ ही, एसआईटी को यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को हटाने या उनसे छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई हो सकती है। जांच एजेंसी इस पहलू को गंभीरता से देखते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि मामला केवल लापरवाही का है या इसके पीछे किसी सुनियोजित साजिश की भूमिका रही है।


  • सीसीटीवी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की भी जांच

    जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी पड़ताल में निगरानी व्यवस्था में हुई कथित चूक और रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की आशंका को प्रमुख बिंदु बनाया है। जिन लोगों की जिम्मेदारी सुरक्षा और निगरानी की थी, उनकी भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। वहीं, यदि रिकॉर्ड मिटाने या बदलने के प्रमाण मिलते हैं तो इसे साजिश के दायरे में देखा जा सकता है।

    ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

    मामले की जांच के दौरान कुछ लोगों ने मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ शिकायतकर्ताओं ने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ कमीशनखोरी के आरोप लगाते हुए एसआईटी को दस्तावेज और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई है। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।

    बताया जा रहा है कि एसआईटी इस मामले में ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों से पूछताछ भी कर चुकी है और प्राप्त जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है।

    ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश संभव

    जांच के दौरान मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा हुई है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दे सकती है। इनमें नए सिरे से ट्रस्ट के गठन और प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने के लिए कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करने की सिफारिश भी शामिल हो सकती है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन मॉडल का अध्ययन किया गया है।

    मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बढ़ी चर्चाएं

    इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया अयोध्या दौरे के बाद मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। राम मंदिर में दर्शन-पूजन के दौरान मुख्यमंत्री और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच सार्वजनिक रूप से सीमित संवाद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    हालांकि, ट्रस्ट और प्रशासन की ओर से जांच या संभावित बदलावों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी ओर, मंदिर से जुड़े धार्मिक और प्रशासनिक कार्यक्रम तय कार्यक्रमों के अनुसार जारी हैं।

    फिलहाल सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और मंदिर प्रबंधन व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की सिफारिश की जाती है या नहीं।

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