
नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) अब 1973 के अरब ऑयल एम्बार्गो (Oil Embargo) के बाद सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहा है। एस एंड पी ग्लोबल के सीईआरए वीक सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख तेल और गैस कंपनियों (Oil and gas companies) के सीईओ ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से रोजाना 8–10 मिलियन बैरल तेल और वैश्विक एलएनजी सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा बाजार से बाहर हो गया है। इसके परिणामस्वरूप जेट फ्यूल, डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति पर अभूतपूर्व दबाव पड़ा है, जिसकी लहर एशिया से यूरोप तक फैल रही है और कीमतों में दीर्घकालिक उछाल लगभग तय माना जा रहा है।
कॉनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने साफ कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल और गैस को वैश्विक बाजार से हटाने के गंभीर परिणाम अपरिहार्य हैं। कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीईओ शेख नवाफ अल-सबाह ने इसे खाड़ी तेल उत्पादकों के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी करार देते हुए कहा कि ईरान ने हॉर्मुज को बंद करके वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना दिया है। स्वतंत्र विश्लेषक पॉल सैंकी ने स्थिति को 1973 के बाद सबसे गंभीर बताते हुए कहा कि ईरान का हॉर्मुज पर डि-फैक्टो नियंत्रण इस संकट को अभूतपूर्व बना देता है।
एलएनजी सप्लाई पर दबाव, तत्काल राहत मुश्किल
चेनीयर के सीईओ जैक फुस्को ने बताया कि कंपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन कर रही है, लेकिन अमेरिका से एशिया तक एलएनजी पहुंचाने में 28 दिन लगते हैं। ऐसे में कतर पर निर्भर एशियाई देशों को तुरंत राहत मिलना मुश्किल है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ वली नसर के अनुसार ईरान कोई साधारण युद्धविराम नहीं चाहता, बल्कि व्यापक समझौता चाहता है, जिसमें हॉर्मुज पर नियंत्रण, आर्थिक मुआवजा और सुरक्षा गारंटी शामिल हों। पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री जनरल जिम मैटिस ने कहा कि फिलहाल संघर्ष गतिरोध में है, लेकिन आगे बढ़ सकता है और अमेरिकी नौसेना के लिए हॉर्मुज से ओमान की खाड़ी तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण होगी।
तीन साल के उच्चतम स्तर पर तेल की कीमतें
सूत्रों के अनुसार युद्ध के दौरान जब वार्ता की उम्मीद बढ़ी तो कीमतें थोड़ी गिरीं, लेकिन तनाव बढ़ते ही फिर उछल गईं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर हमले की धमकी से पीछे हटते हुए कहा कि तेहरान समझौता चाहता है, लेकिन निवेशकों की चिंता बरकरार रही। 28 फरवरी को अमेरिकी कच्चा तेल 49% बढ़कर 99.64 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट 55% उछलकर 112.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले तीन साल का उच्चतम स्तर है।
सरकारें अपने तेल भंडार सुरक्षित कर रही हैं, जिससे वैश्विक कमी और गहरी होने का खतरा बढ़ गया है। टोटलएनर्जी के सीईओ पैट्रिक पुइयाने के मुताबिक जेट फ्यूल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल और डीजल 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो असामान्य उछाल है। रूस और चीन ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है, जबकि थाईलैंड में पेट्रोल की राशनिंग शुरू हो गई है। यह कमी एशिया में फैल चुकी है और अप्रैल तक यूरोप को भी प्रभावित कर सकती है।
खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर खतरा
विशेषज्ञ पॉल सैंकी के अनुसार यह संकट खाड़ी देशों के आर्थिक मॉडल को चुनौती दे सकता है। इराक, कतर, यूएई और संभावित रूप से सऊदी अरब की जीडीपी में 30% तक गिरावट का जोखिम है। जनरल मैटिस ने चेतावनी दी कि अमेरिका ने अपने खाड़ी सहयोगियों से बिना परामर्श युद्ध शुरू किया और अब इसे आसानी से नियंत्रित नहीं कर सकता। उनका कहना है कि इस संघर्ष के अंत का निर्णय ईरान के हाथ में है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर लंबी अवधि तक रहेगा।
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