नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी नौसेना (us Navy) की ओर से ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के एक दिन बाद तेहरान ने वाशिंगटन (Washington) को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि दोनों देशों के बीच टकराव के हालात अब बदल चुके हैं और अमेरिका को इस नई स्थिति को समझ लेना चाहिए।
गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के हितों या उसकी सुरक्षा पर दोबारा हमला किया गया तो तेहरान की प्रतिक्रिया पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज, भारी और दर्दनाक हो सकती है। उन्होंने अमेरिका को आगाह किया कि वह इस बदलाव को समय रहते समझ ले, वरना स्थिति उसके हाथ से निकल सकती है।
ईरान की यह चेतावनी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाई के बाद सामने आई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर मिसाइल हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसके जहाज ईरानी मिसाइल हमले से बचने में कामयाब रहे और किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है। इसके बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाने की कार्रवाई की।
इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। अमेरिकी नौसेना के एडमिरल और CENTCOM कमांडर ब्रैड कूपर ने संकेत दिया कि यदि अमेरिकी सैन्य ठिकानों या जहाजों पर हमले दोहराए गए तो ईरान को इसकी और गंभीर आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
गालिबाफ का बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि ईरान अब सीधे तौर पर अमेरिका को संभावित जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है। उनके मुताबिक, मौजूदा टकराव को पुराने नियमों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
ईरानी नेतृत्व का संकेत है कि अगर उसके सैन्य या आर्थिक हितों को निशाना बनाया गया तो जवाब का दायरा पहले से बड़ा हो सकता है। इससे क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव के और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का एक अहम केंद्र अब होर्मुज जलडमरूमध्य भी बनता जा रहा है। ईरान ने रविवार को दावा किया कि एक अमेरिकी जहाज ने होर्मुज के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की थी और इसके बाद उसे निशाना बनाया गया।
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से इस दावे की तत्काल पुष्टि नहीं की गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य झड़प का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की जवाबी चेतावनी के बाद अब पूरे मध्य पूर्व में स्थिति पर नजरें टिकी हैं। अगर दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव आगे बढ़ता है तो खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों, नौसैनिक जहाजों और ऊर्जा मार्गों पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि तनाव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या इसका दायरा और बढ़ता है।
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