लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीकेटी क्षेत्र (Lucknow’s BKT area) से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। करीब 27 महीने पहले जिस युवती को मृत मानकर परिवार ने उसका अंतिम संस्कार (Lucknow’s BKT area) कर दिया था और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था, वही युवती अब जिंदा अपने मायके लौट आई है।
इस घटनाक्रम ने न सिर्फ परिवार बल्कि पुलिस को भी उलझन में डाल दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अज्ञात महिला के शव का अंतिम संस्कार शिवानी समझकर किया गया था, वह आखिर कौन थी।
4 मई 2024 को लापता हुई थी शिवानी
मामले की शुरुआत 4 मई 2024 को हुई थी। नवीकोट नंदना गांव की रहने वाली 28 वर्षीय शिवानी अपने ससुराल से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी।
परिजनों ने बीकेटी थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस उसकी तलाश कर ही रही थी कि करीब डेढ़ महीने बाद 16 जुलाई 2024 को आईआईएम रोड के पीछे एक नाले से एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ।
कलावा और अंगूठी देखकर कर ली पहचान
पुलिस की सूचना पर शिवानी के मायके वाले मौके पर पहुंचे। शव की हालत ऐसी थी कि पहचान आसान नहीं थी। परिजनों ने हाथ में बंधे कलावा और अंगूठी को देखकर शव की पहचान शिवानी के रूप में कर दी।
इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में अज्ञात महिला का शव शिवानी मानकर भैंसाकुंड घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
ससुराल वालों पर दर्ज हुआ दहेज हत्या का केस
बेटी की मौत मान चुके मायके पक्ष ने इसके बाद ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज करा दिया। इस मुकदमे के बाद पूरा मामला गंभीर आपराधिक जांच के दायरे में आ गया।
लेकिन करीब दो साल से ज्यादा समय बाद सामने आए नए घटनाक्रम ने पूरे केस की दिशा बदल दी।
5 सितंबर 2026 को अचानक घर पहुंची शिवानी
मामले में सबसे बड़ा मोड़ 5 सितंबर 2026 को आया, जब मृत समझी जा चुकी शिवानी अचानक अपने मायके पहुंच गई।
उसे जिंदा देखकर परिवार और गांव के लोग हैरान रह गए। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आ रही है कि वह इस दौरान लखनऊ के पारा इलाके में जावेद नाम के एक युवक के साथ रह रही थी।
हालांकि, शिवानी इतने लंबे समय तक घर से दूर क्यों रही और उसने परिवार या पुलिस से संपर्क क्यों नहीं किया, इन सवालों के जवाब अभी जांच का हिस्सा हैं।
अब अज्ञात महिला की पहचान बनी सबसे बड़ी चुनौती
शिवानी के जीवित मिलने के बाद बीकेटी पुलिस के सामने अब दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, उस महिला की पहचान करना जिसका शव 2024 में नाले से मिला था और शिवानी समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
दूसरी, यह पता लगाना कि सिर्फ कलावा और अंगूठी के आधार पर हुई पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।
दहेज हत्या केस की दिशा भी बदली
शिवानी के जिंदा मिलने के बाद पहले से दर्ज दहेज हत्या के मुकदमे की जांच भी अब नए सिरे से होगी। पुलिस को यह देखना होगा कि पुराने केस में लगाए गए आरोपों पर अब क्या कानूनी कार्रवाई बनती है।
बीकेटी थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सिंह के मुताबिक, शिवानी से विस्तार से पूछताछ की जा रही है और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
फिलहाल इस मामले ने पुलिस के सामने एक नया रहस्य खड़ा कर दिया है—अगर शिवानी जिंदा है, तो 27 महीने पहले अंतिम संस्कार किस महिला का किया गया था?
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