
नई दिल्ली: अमेरिका (United States) के राष्ट्रपति (President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान (Iran) पर झूठी खबरें (Fake News) फैलाने का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ईरान लगातार फेक न्यूज और एआई से तैयार किए गए वीडियो (AI Videos) के जरिए गलत जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के अनुसार इस तरह का प्रचार ईरान के लिए ही नुकसानदायक साबित हो रहा है और इससे वह खुद अपना सत्यानाश कर रहा है।
दरअसल हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ईरान ने अमेरिका के कई सैन्य विमानों और युद्धपोतों को नुकसान पहुंचाया है। इन रिपोर्ट्स में कहा गया कि अमेरिकी सेना के पांच रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को मार गिराया गया है। हालांकि ट्रंप ने इन सभी दावों को पूरी तरह झूठा बताते हुए खारिज कर दिया है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की ओर से एआई तकनीक का इस्तेमाल कर नकली वीडियो तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें सोशल मीडिया व कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अमेरिकी मीडिया संस्थान भी ऐसी खबरों को बढ़ावा दे रहे हैं जिससे गलत जानकारी फैल रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने खास तौर पर वॉल स्ट्रीट जर्नल का जिक्र करते हुए कहा कि इस अखबार ने गलत रिपोर्टिंग की है। उनके मुताबिक जिन विमानों को मार गिराने का दावा किया जा रहा है वे सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं और जल्द ही अपनी नियमित उड़ान भरेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि जिन इमारतों और जहाजों के नष्ट होने की बात कही गई है वह भी पूरी तरह झूठी है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान अब मीडिया मैनिपुलेशन में माहिर हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत कमजोर है लेकिन वह झूठी खबरों और प्रचार के जरिए खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के अनुसार एआई तकनीक के जरिए इस तरह की गलत सूचनाओं को और तेजी से फैलाया जा रहा है।
अमेरिकी मीडिया पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने कहा कि जो संस्थान इस तरह की झूठी खबरों को बढ़ावा दे रहे हैं उन्हें इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई मीडिया संगठन जानबूझकर फर्जी खबरें फैलाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि ऐसे मीडिया संस्थानों के लाइसेंस भी रद्द किए जा सकते हैं क्योंकि उन्हें अमेरिका में फ्री एयरवेव्स का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली हुई है।
इस बीच ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने यह कहते हुए ईरान पर हमले किए थे कि वे उसके परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। इसके साथ ही ईरान के लोगों से भी अपने नेताओं के खिलाफ खड़े होने की अपील की गई थी।
इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और फारस की खाड़ी के आसपास के कुछ इलाकों पर हमले किए। इस संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई देशों की विमान सेवाएं प्रभावित हुई हैं और तेल निर्यात में भी बाधा आई है जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
ट्रंप ने इस स्थिति को देखते हुए तेल और गैस निर्यात पर निर्भर देशों से अपील की है कि वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत तैनात करें। हालांकि अभी तक किसी देश ने इस पर औपचारिक प्रतिबद्धता नहीं जताई है लेकिन कई देशों ने इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है।
वहीं इजराइल ने भी कहा है कि उसने रविवार को ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान जारी रखे हैं। खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों जैसे बहरीन सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है और बताया है कि वे उनकी ओर आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए सुरक्षा कदम उठा रहे हैं।
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