
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान-इजरायल-अमेरिका (Iran-Israel-America) जंग अब सीधे ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर (Energy Infrastructure) तक पहुँच गई है। ईरान ने कतर के रास लाफान एलएनजी (LNG) हब पर मिसाइल हमला किया, जिससे बड़े पैमाने पर आग लग गई और ढांचागत नुकसान हुआ। इस घटना के चलते गैस और तेल की वैश्विक कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।
ईरान ने क्यों किया हमला
ईरान ने यह कदम इजरायल द्वारा उसके साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद उठाया। इस हमले में ईरान ने कतर, सऊदी अरब और यूएई में तेल और गैस के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकी दी थी। रास लाफान कॉम्प्लेक्स कतर की सबसे अहम गैस सुविधाओं में से एक है और यहां लगी आग ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है।
भारत पर असर क्यों ज्यादा होगा
भारत अपनी LNG जरूरतों का करीब 47% हिस्सा कतर से आयात करता है। सालाना करीब 27 मिलियन टन एलएनजी में से लगभग 12-13 मिलियन टन कतर से आता है। अब रास लाफान फैसिलिटी पर हमला होने के कारण भारत के लिए सस्ती गैस की सप्लाई खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और टैंकर फंसे होने की वजह से सप्लाई और धीमी हो सकती है।
भारत में संभावित महंगाई
कतर से महंगी गैस आने की स्थिति में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होने से अन्य गैस आधारित उद्योगों और रसोई गैस की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। यदि रास लाफान पूरी तरह ठप हो जाता है, तो भारत को दूसरे स्रोतों से महंगी LNG खरीदनी पड़ेगी।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर असर
रास लाफान पर हमला ऊर्जा युद्ध का नया मोड़ है। खाड़ी क्षेत्र के इस अहम हब पर हमले के बाद ब्रेंट क्रूड और गैस की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। दुनिया के तेल और गैस बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा।
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