
नई दिल्ली । ईरान (Iran) के सर्वोच्च नेता के भारत प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही (Dr. Abdul Majid Hakim Ilahi) ने परमाणु हथियारों (Nuclear weapons) को हराम बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार बनाने की इच्छा नहीं की, क्योंकि यह हराम है। ईरान परमाणु ऊर्जा (Nuclear energy) का उपयोग शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए करना चाहता है, जैसे सामाजिक और मानवीय जरूरतें पूरी करना। उन्होंने कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। ईरान पर भारी प्रतिबंध लगाए जाते हैं और उसके परमाणु स्थलों की सख्त निगरानी होती है, लेकिन अन्य देशों के मामले में चुप्पी साध ली जाती है।
जून 2025 में इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। पिछले महीने परमाणु अप्रसार पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में ईरान के कार्यक्रम पर मतभेद उभरा। कुछ सदस्य प्रतिबंध बहाल करने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य इन्हें स्थायी रूप से हटाने और बैठक की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं। विवाद 2015 के संयुक्त व्यापक कार्ययोजना (JCPOA) समझौते पर केंद्रित है, जिसमें ईरान ने चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और यूरोपीय संघ के साथ हस्ताक्षर किए थे।
भारत और ईरान के पुराने संबंधों का जिक्र
डॉ. इलाही ने भारत-ईरान के पुराने संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस्लाम के उदय से सैकंडों वर्ष पहले दोनों देशों के बीच सहयोग था। ईरान में भारतीय गणित, खगोलशास्त्र और चिकित्सा की उपलब्धियों का अध्ययन होता था। ईरान के सर्वोच्च नेता हमेशा भारत के साथ अच्छे संबंधों पर जोर देते हैं। उन्होंने चाबहार बंदरगाह पर सहयोग की उम्मीद जताई। विश्वविद्यालयों में भारतीय दर्शन की किताबें पढ़ाई जाती थीं। स्कूलों में दोनों प्राचीन सभ्यताओं के बीच संबंध सिखाए जाते हैं। ईरान को लगे आर्थिक प्रतिबंधों से समस्याएं हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। कुछ लोग नाराज हैं, लेकिन अन्य इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह सही नहीं हैं।
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