
दुबई। अमेरिका और इजरायल (America and Israel)( से जंग (War) लड़ रहे ईरान (Iran) ने किसी भी तरह की बातचीत की संभावना से इनकार किए जाने के बाद सोमवार तड़के एक बार फिर खाड़ी देशों को अपना निशाना बनाया है। जानकारी के मुताबिक एक ड्रोन हमले (Drone Attacks) के बाद दुबई एयरपोर्ट (Dubai Airport.) के पास भीषण आग लग गई है, जिससे अफरा तफरी मच गई। अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी है। दुबई मीडिया ऑफिस ने बताया है कि आग पर काबू पाने की कोशिशें की जा रही हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया गया, “अधिकारी फिलहाल दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आस-पास ड्रोन से जुड़ी एक घटना के कारण लगी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं।” इसमें आगे कहा गया, “सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।” यह हमला ईरान की तरफ से उस चेतावनी के बाद हुआ है जिसमें कहा गया था कि इन ठिकानों पर अमेरिकी सेना के जवान छिपे हुए हैं। ईरान के सरकारी टीवी द्वारा जारी इस चेतावनी में दुबई और दोहा में कुछ खास ठिकानों पर हमले की बात कही गई थी और लोगों से इन जगहों को तुरंत खाली करने की अपील भी की गई थी। ईरान ने यह भी कहा था कि आने वाले कुछ घंटों में कुछ खास इलाकों में हमला हो सकता है।
लगातार मिसाइलें और ड्रोन बरसा रहा ईरान
इससे पहले अरब खाड़ी देशों ने रविवार को भी अपने ऊपर मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना दी थी। गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी ईरान पर हमला हमले के बाद से पश्चिम एशिया में भीषण जंग जारी है। ईरान ने जवाब में इजरायल के साथ साथ फारस की खाड़ी के आसपास के पड़ोसी देशों पर लगातार हमले किए हैं। इस संघर्ष के कारण वैश्विक विमानन सेवाएं अस्त-व्यस्त हो गई हैं, तेल निर्यात बाधित हुआ है और दुनियाभर में ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है।
इससे पहले, ईरान ने लोगों से संयुक्त अरब अमीरात के तीन बंदरगाहों को खाली करने का आग्रह किया था। ईरान ने पश्चिम एशिया के सबसे व्यस्त बंदरगाह और संयुक्त अरब अमीरात के दो अन्य बंदरगाहों को खाली करने का आह्वान किया। यह पहली बार है जब ईरान ने किसी पड़ोसी देश की गैर-अमेरिकी परिसंपत्तियों पर हमले की खुले तौर पर धमकी दी। ईरान ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात के मुख्य टर्मिनल वाले खार्ग द्वीप पर हमला करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात में ”बंदरगाहों, ‘डॉक’ और ठिकानों” का इस्तेमाल किया।
ईरान के आरोप
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात से खार्ग और अबू मूसा द्वीपों पर हमले किए। उन्होंने कहा कि यह स्थिति खतरनाक है और ईरान कोशिश करेगा कि ‘वहां किसी भी आबादी वाले इलाके पर हमला न किया जाए।’ अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने ईरान के इस आरोप को खारिज दिया कि खार्ग द्वीप पर हमले के लिए अमेरिका ने अमीरात की जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया।
अर्थव्यवस्थाएं हो रहीं प्रभावित
संघर्ष के दौरान ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और ओमान पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागी हैं। ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, लेकिन हवाई अड्डों और रिहायशी इलाको में हमलों की सूचनाएं भी सामने आईं। हालांकि इन देशों की वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकतर हमलों को नाकाम कर दिया, फिर भी इस युद्ध से काफी नुकसान हुआ है और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी प्रभावित हुई हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान के हमलों में खाड़ी देशों में कम से कम 12 आम लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर प्रवासी मजदूर थे।
युद्ध में सैंकड़ों लोगों की मौत
वहीं ईरान में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के अनुसार अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मरने वालों में 223 महिलाएं और 202 बच्चे शामिल हैं। वहीं इजरायल में ईरान के मिसाइल हमलों से 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका के कम से कम 13 सैनिकों की भी जान जा चुकी है। लेबनान का मानवीय संकट और गहरा गया है। इजरायल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ कई हमले किए जिनमें 800 से अधिक लोग मारे गए हैं और 8,50,000 लोग विस्थापित हो गए हैं।
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